बदस्तूर जारी है कानपुर देहात में प्राइवेट अस्पतालों के फर्जीवाड़े का सिलसिला

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  • अब डीएम नेहा जैन खुद इनके खिलाफ कमर कस रही हैं  

शिवम तिवारी, कानपुर।सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के तल्ख तेवर के बाद भी कानपुर देहात में प्राइवेट अस्पतालों के फर्जीवाड़े का सिलसिला बदस्तूर जारी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अग्निशमन विभाग द्वारा अस्पतालों को दिए गए एनओसी के आंकड़े अलग अलग हैं। बड़ा सवाल यह है कि फिर कैसे कर रहा है स्वास्थ विभाग प्राइवेट अस्पतालों के राजिस्ट्रेश।

कानपुर देहात में प्राइवेट अस्पतालों के फर्जीवाड़े की जो तस्वीर हम आपको दिखाने जा रहे हैं वो यकीनन स्वास्थ विभाग की कलई खोल देगी। दरअसल प्राइवेट अस्पतालों के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग में राजिस्ट्रेशन कराना होता है जिसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एनओसी देता है जिसके बाद अग्निशमन विभाग एनओसी देता है साथ ही बिजली विभाग भी एनओसी देता है। तब जाकर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन होता है लेकिन यहां एनओसी के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े कुछ है। अग्निशमन विभाग के आंकड़े चौका देने वाले है और स्वास्थ्य विभाग में अस्पतालों के आंकड़े एकदम अलग है यानी कानपुर देहात में प्राइवेट अस्पताल फर्जीवाड़े की बुनियाद और स्वास्थ्य विभाग के रहमो करम पर फल फूल रहे है।

कानपुर देहात में सैकड़ों की तादाद में प्राइवेट अस्पताल फल फूल रहे है और ये सब स्वास्थ विभाग की मेहरबानी के चलते हों रहा है। दरअसल प्राइवेट अस्पताल संचालन के लिए मानक है। अस्पताल चलाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेना होती है अग्निशमन विभाग एनओसी देता है साथ ही बिजली विभाग भी नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट देता है तब जाकर स्वाथ्य विभाग अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करता है। लेकिन कानपुर देहात में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 22 अस्पतालों को एनओसी देने की बात कह रहा है और अग्निशमन विभाग का आंकड़ा एकदम अलग है और स्वास्थ्य विभाग में रजिस्टर्ड अस्पतालों की संख्या 50 से ज़्यादा है कुछ का आवेदन पड़ा है जबकि कानपुर देहात में अस्पतालों की संख्या लगभग 200 के करीब है। बड़ा सवाल है कि आखिर ये 200 के नज़दीक अस्पताल किसके रहमो करम पर फल फूल रहे है किसका इन अवैध अस्पतालों को सरंक्षण है।

हमने जायज़ा लिया कि आखिर प्राइवेट अस्पताल संचालकों की समस्या क्या है वो स्वास्थ्य विभाग के मानकों को पूरा करके अस्पताल आखिर क्यों नही चला रहे है। हम इस बात की तज़दीक करने मुख्यालय से महज 2 किलोमीटर के फासले पर बने अकबरपुर के पवन तनय अस्पताल पहुचे हमने देखा कि अस्पताल का आधा हिस्सा स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने सीज कर दिया है। हमने वजह पूछी तो पता चला कि निरीक्षण के वक्त अस्पताल से डॉक्टर नदारद थे अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ये तक नही बता पाए कि अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है भी या नही बावजूद इसके अस्पताल धड़ल्ले से चल रहा था

वही नज़दीक में ब्रहम्मा हॉस्पिटल था हमने ब्रहम्मा हॉस्पिटल में जाकर जानकारी करी तो पता चला कि ब्रहम्मा हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन ही नहीं है। मात्र राजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है बावजूद इसके अस्पताल चल रहा है। स्वास्थ विभाग में अस्पताल प्रभारी एस एल वर्मा है जिनकी अस्पतालों में विज़िट लगी रहती है। सभी अस्पताल के संचालक उनके संपर्क में रहते है लिहाज़ा डॉक्टर एस एल वर्मा की भूमिका संदिग्ध है

इस बाबत हमने स्वास्थ विभाग के सीएमओ से बात की तो वो अपने विभाग के अधिकारियों की वकालत करते नज़र आए कहा हो सकता है कि प्रोविजनल एनओसी अस्पताल संचालकों ने लगा कर रजिस्ट्रेशन कराया हो और 30 अप्रैल तक अस्पताल संचालकों के पास रजिस्ट्रेशन कराने का समय है अग्निशमन विभाग लगातार मौक ड्रिल करा रहा है और जो मानकों को पूरा कर रहे है उनको एनओसी दी जा रही है स्वास्थ्य विभाग में कितने अस्पतालो का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इसका जवाब सीएमओ साहब के पास भी नहीं था। फिलहाल जांच करने के बाद कार्रवाई का दावा सीएमओ साहब की तरफ से किया जा रहा है।

  जिला अधिकारी नेहा जैन के संज्ञान में भी मामला पहुंच गया है। कानपुर देहात में नियुक्त हुयी जिलाधिकारी स्वास्थ विभाग की कारगुजारी सुन कर भौचक्का रह गयी और स्पष्ट कहा कि मामले की पूर्ण रूप से जांच कराई जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने के बाद कार्रवाई की जाएगी

बहरहाल कानपुर देहात में स्वास्थ्य अधिकारियों की निगहबानी के चलते प्राइवेट अस्पताल फल फूल रहे है मोटी मलाई काट रहे हैं। अब नई ज़िलाधकारी ने प्राइवेट अस्पतालो पर नज़र टेडी है और लोगो को उम्मीद है कि तेज़ तर्रार जिलाधिकारी नेहा जैन स्वास्थ विभाग के इस फर्जीवाड़े को समाप्त करेंगी।।

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