कोडरमा के बगडो गांव को खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित किए जाने की हकीकत कुछ और है

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राज कुमार यादव, कोडरमा। एक बार फिर पंचायत चुनाव की डुगडुगी बज चुकी है। इसके साथ ही गांव की सरकार को बनाने को लेकर गांव का माहौल बदल चुका है। कई मुखिया मैदान में है,तो वहीं गांव के लोग पांच साल के हिसाब किताब में लग चुके है। हमारी टीम गांव की हकीकत जानने के लिए निकल पड़ी है। सबसे पहले हम कोडरमा के बगडो गांव पहुंचे। ग्रामीणों की माने तो यहां 5 साल कार्य के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई है। रफ्तार मीडिया की टीम ने यहां पिछले पांच साल किए गए कार्यों की विकास के साथ कौन सी समस्या लोगों के बीच बनी हुई है इसके बारे में लोगों से बात की। जिसमें पता चला कि बगडो पंचायत को खुले में शौच मुक्त गांव घोषित कर दिया गया है, जगह जगह बोर्ड भी लगा दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत में पता चला कि कई परिवारों को शौचालय नहीं मिला है, लोग खुले में शौच जाने को मजबूर है।

एक आदर्श गांव की परिकल्पना कीजिए जहां पंचायत भवन हो, स्कूल हो, खेल का मैदान हो, गांव में बिजली, पानी ,सड़क, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं हो।

गांव के लोग जिस उम्मीद के साथ मुखिया का चयन किए थे,उस उम्मीद पर मुखिया खरा नहीं उतरे तो समझा जा सकता है कि गांव का विकास मुखिया के घूसखोरी के भेट चढ़ जाता है।गांव के लोगों का सपना रहता है कि हमारा एक अच्छा घर हो, शौचालय हो, पानी की व्यवस्था हो। लेकिन गांव की सबसे बड़ी समस्या जरूरतमंदों को आवास,शौचालय, जल संकट अभी भी बरकरार है।

गांव की तस्वीर देखने के बाद लगता है कि लोगों का सपना सपना ही रह गया। हालांकि गांव में जनता मुखिया के काम से आक्रोशित है।

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