अजान देना धार्मिक अधिकार, मस्जिदों पर भोंपू लगाना नहीं

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अजान देना, धार्मिक अधिकार हो सकता है परंतु उसके लिए मस्जिदों पर भोंपू लगाना, यह धार्मिक अधिकार कदापि नहीं हो सकता। सर्वोच्च न्यायालय एवं देश के लगभग 15 उच्च न्यायालयों का स्पष्ट आदेश है कि ध्वनिप्रदूषण कर अन्यों के मौलिक अधिकारों का हनन करनेवाले भोंपुओं पर कारवाई करनी चाहिए। जिस प्रकार बाबरी मस्जिद प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन न करने से उत्तर प्रदेश के कल्याणसिंह सरकार पर न्यायालय का अपमान करने की कारवाई की गई थी, वैसी ही कठोर कारवाई मस्जिदों पर लगे भोंपुओं द्वारा होनेवाला ध्वनिप्रदूषण न रोकने के कारण न्यायालय का अपमान करनेवाले देश के सभी राज्य सरकारों पर करनी चाहिए, ऐसे स्पष्ट प्रतिपादन ‘लष्कर-ए-हिंद’के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री. ईश्‍वरप्रसाद खंडेलवाल ने किया। हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘मस्जिदों पर भोंपुओं द्वारा हो रहा ध्वनिप्रदूषण: कानून एवं न्यायालय का क्या मत है ?’ इस विषय पर आयोजित ऑनलाइन ‘विशेष संवाद’में वो बोल रहे थे। इस समय हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. वैभव आफळे एवं कु. क्रांती पेठकर द्वारा पुछे प्रश्‍नों का उत्तर वो दे रहे थे। इसलिए न्यायालय का कहना है कि बिना अनुमति भोंपू पर से अथवा ध्वनिप्रदूषण संबंधी कानून का उल्लंघन कर कोई यदि अजान दे रहा हो, तो उसपर कठोर कारवाई करनी चाहिए। इसलिए न्यायालय का कहना है कि बिना अनुमति भोंपू पर से अथवा ध्वनिप्रदूषण संबंधी कानून का उल्लंघन कर कोई यदि अजान दे रहा हो, तो उसपर कठोर कारवाई करनी चाहिए।

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