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Wednesday, September 28, 2022
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अभी कोसो दूर है विकास, ‘अमेठी’ सिर्फ नाम ही खास

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राहुल शुक्ला,अमेठी : उत्तर प्रदेश का अमेठी नाम सुनते ही दिमाग में जो सबसे पहली बात आती है वो ये कि अच्छा अमेठी,कांग्रेस का गढ़।जी हां आना जायज़ भी है क्योंकि कांग्रेस ने हमेशा अमेठी को नेहरू-गांधी परिवार की सीट के रूप में बताया है । कई दशक से ये सीट इस परिवार की जागीर के रूप में पेश की गई पर यहाँ की बदहाली देखकर दिल सिहर उठता है । यहां पर विकास की रफ्तार धीमी होने की वजह से ज्यादातर लोग असंतुष्ट हैं ।लोगों का मानना है कि उनको जो मिलना चाहिए था वह नहीं मिला।
अमेठी में कांग्रेस से सांसद राहुल गांधी को हराकर भाजपा सांसद स्मृति ईरानी ने जीत दर्ज की तो अमेठी के क्षेत्रवासियों में विकास की लहर दौड़ उठी थी लेकिन कहीं न कहीं अमेठी के बाजार शुकुल में डाक बंगला अपनी जर्जर हालत पर आज भी रो रहा हैं। इस तरफ भाजपा सरकार के नेता भी नहीं दे रहे हैं ध्यान।

उद्धारक की बाट जोह रहा शुकुल बाजार का डाक बंगला-
अमेठी के शुकुल बाजार में स्थित लगभग सन 1940 में बना ऐतिहासिक डाक बंगला भवन वर्षों से उद्धारक की बाट जोह रहा है।क्षेत्रवासियो का कहना है कि ब्रिटिश कालीन भारत में बने इस ऐतिहासिक डाकबंगला भवन में तो प्रदेश व केंद्र सरकार के बड़े बड़े नेताओं का जमघट लगता था जनपद की राजनीति भी यहीं सी तय होती थी साथ ही इसी डाक बंगला भवन में कभी प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व० राजीव गाँधी अपने परिवार के साथ रात्रि विश्राम किया करते थे।
दिन गुजरते गये और विभागीय अधिकारियों ने इसे नजर अंदाज कर अपनी नजरें फेर लीं तथा डाकबंगला भवन की हालत बद से बदतर होने लगी धीरे धीरे खिड़की दरवाजे सहित मंजिलें भी जर्जर हो गयी अंदर रखी गयी मूल्यवान चीजे तो विभाग के नाक के नीचे से ही गायब हो गयी । बावजूद इसके किसी ने इसकी ओर नजर उठाकर नहीं देखा। यह बंगला अब तो भूत बंगला में तब्दील हो गया है। राहुल गांधी सहित अन्य जनप्रतिनिधि व मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भी शुकुल बाजार दौरे पर आते हैं लेकिन उसके बाद भी आज तक इस डाक बंगला भवन की हालत में सुधार नही आया । अभी कुछ सालों पहले ही शासन द्वारा भी सभी डाक बंगला भवन के रखरखाव की कार्ययोजना बनायी गयी थी और दावा किया गया था कि अब जर्जर हालत में पड़े सभी डाक बंगले चमक जायेंगे लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है यदि अमेठी के इस डाक बंगला भवन को अनदेखी के अतिक्रमण मुक्त कराकर जीर्णोद्धार करा दिया जाय तो एक धरोहर की सुरक्षा हो सकती है।

कभी वीवीआईपी क्षेत्र में होने का गौरव प्राप्त लोग रौब गालिब कर अमेठी क्षेत्र में रहने का गर्व किया करते थे। लेकिन आज यहां की विकास की धीमी गति और बदहाली के कारण लोगों को अब अमेठी क्षेत्र को अब अपना कहना भी नागवार गुजर रहा है। अरबों खरबो रुपए खर्च होने के बाद भी यहाँ की बदहाली जस की तस पड़ी हुई हैं जिसे लेकर लोगो में काफी निराशा देखने को मिल रही है। अमेठी में जनप्रतिनिधि,और अधिकारी दौरे कर जनपद की उन्नति का खाका खींचते से दिखते तो हैं, लेकिन जिस विकास से स्थानीय लोगों की हालत सुधर सकती है, उस पर ध्यान ही नहीं दिया गया।
उत्तर प्रदेश के अमेठी क्षेत्र कहने को तो राहुल गाँधी संसदीय क्षेत्र और कांग्रेस का गढ़ रहा है लेकिन यहाँ की हालत देखकर दिल सिहर उठता है।यहां पर विकास की रफ्तार धीमी होने की वजह से ज्यादातर लोग असंतुष्ट हैं लोगों का मानना है कि उनको जो मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। यहाँ न तो पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को बचाया जा रहा है न ही गरीब जनता को घर मुहैया कराया जा रहा है। गरीबों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही इंदिरा और लोहिया आवास जैसी योजनाओ की नींव अमेठी में तो सिर्फ कागज के ऊपर ही डाल दी गई है। जिसके बाद से कागज़ के आशियाने पर आस लगाये है यहां की गरीब जनता।
1940 में बना ऐतिहासिक डाकबंगला भवन भूत बंगले में तब्दील होता जा रहा
अमेठी के शुकुल बाजार में स्थित लगभग सन 1940 में बना ऐतिहासिक डाकबंगला भवन वर्षों से उद्धारक की बाट जोह रहा है।
ब्रिटिश कालीन भारत में बने इस ऐतिहासिक डाकबंगला भवन में कभी प्रदेश तो कभी केंद्र सरकार के बड़े बड़े नेताओं का जमघट लगता था।
इसी डाक बंगला भवन में कभी प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व० राजीव गाँधी अपने परिवार के साथ रात्रि विश्राम किया करते थे।
लेकिन वक़्त के साथ साथ देखभाल से वंचित ये डाक बंगला अब भूत बंगले में तब्दील होता जा रहा है
राहुल गांधी सहित भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधि व मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भी शुकुल बाजार दौरे पर आते हैं , पूर्व विधायक राज्य मंत्री सुरेश पासी की विधान सभा क्षेत्र में स्थित है डाक बंगला लेकिन उसके बाद भी आज तक इस डाक बंगला भवन की हालत में सुधार नही आया। अभी कुछ सालों पहले ही शासन द्वारा भी सभी डाक बंगला भवन के रखरखाव की कार्ययोजना बनायी गयी थी। जिसमे दावा किया गया था कि अब जर्जर हालत में पड़े सभी डाक बंगले चमक जायेंगे
लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
यदि अमेठी के इस डाक बंगला भवन को अनदेखी के अतिक्रमण मुक्त कराकर जीर्णोद्धार करा दिया जाय
तो एक धरोहर की सुरक्षा हो सकती है।

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