सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया

रांची: राजधानी रांची के मोराबादी स्थित रामकृष्ण मिशन आश्रम में बुधवार को गुरुपूर्णिमा के  अवसर पर "गुरुपूर्णिमा सह भक्त सम्मेलन" का भव्य आयोजन किया गया। "दैनिक जीवन में गुरु की उपयोगिता" विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधकों और भक्तों ने भाग लिया।कार्यक्रम की शुरुआत पूजा एवं आरती से हुई तत्पश्चात आश्रम के सचिव स्वामी भवेशानंद  महाराज के मार्गदर्शन में शांति मंत्र, गुरु वंदना, जप और ध्यान का अभ्यास कराया गया, जिससे आयोजन में आध्यात्मिकता झलक उठी।

गुरुपूर्णिमा पर रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों का स्मरण

रामकृष्ण मिशन आश्रम मोराबादी के सह सचिव स्वामी अन्तरानंद  महाराज ने श्रीरामकृष्ण देव के उपदेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु वह है, जो मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है और आत्मज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। वहीं,स्वामी इष्टाकामानंद महाराज ने शास्त्रों के आधार पर गुरु शिष्य परंपरा की महत्व को बताते हुए आदर्श गुरु और योग्य शिष्य के गुणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इसे भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया।

गुरु और शिष्य के रिश्ते के महत्ता का किया गया जिक्र

मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए संत मेही आश्रम, रांची के आचार्य स्वामी निर्मलानंद महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माली पौधों की छंटाई कर उन्हें सुंदर और विकसित बनाता है, उसी प्रकार गुरु शिष्य के दोषों को दूर कर उसके व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।

भगवत नाम के साथ कर्म ही जीवन का कल्याणकारी मार्ग-स्वामी भवेशानंद

रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी भवेशानंद ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए  वेद एवं वेदांत की महिमा का उल्लेख किया । उन्होंने कहा कि परमात्मा ही समस्त सृष्टि के रचयिता हैं तथा सद्गुरु ही साधक को परमात्मा की प्राप्ति का मार्ग दिखाते हैं। स्वामी भवेशानंद महाराज ने बताया कि मनुष्य को अपने सभी कार्य भगवत नाम का स्मरण करते हुए करने चाहिए। इससे न केवल स्वयं का आध्यात्मिक कल्याण होता है, बल्कि समाज और समस्त जगत का भी हित होता है। उन्होंने श्रीरामकृष्ण देव के "शिव भाव से जीव सेवा" के संदेश को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा का सर्वोत्तम माध्यम है।

भक्त सम्मेलन में भजनो की प्रस्तुति रहा आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के दौरान स्वामी इष्टाकामानंद , स्वामी प्रभुनामानंद , स्वामी ईश्वरानंद  एवं श्यामल रॉय ने भक्ति संगीत और भजनों की प्रस्तुति दी। संगीत में दिलीप बनर्जी एवं रेणु शंकर मिश्रा ने भी सहयोग किया।सम्मेलन के अंतिम चरण में संतों ने श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर दिए। इस अवसर पर रामकृष्ण मिशन आश्रम के नए मंदिर निर्माण में सहयोग देने वाले भक्तों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुरेश नारायण झा एवं प्रीतम बनिक ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन को सफल बनाने में माँ सारदा महिला समिति, विवेकानंद फोरम, विवेकानंद योगा वेलनेस सेंटर, आश्रम के भक्तों एवं कर्मचारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।