रिपोर्टर रोहित कुमार/बिजनौर
एंकर:-बिजनौर डीएम ऑफिस के बाहर ‘पल्ला डाल’ धरना, भाकियू (प्रधान) ने दिखाई ताकत — 12 मांगों पर प्रशासन से सीधा टकराव
बिजनौर में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (प्रधान) का तेवर देखने लायक रहा। गन्ना समिति परिसर में आयोजित मासिक बैठक महज औपचारिक नहीं रही, बल्कि किसानों के गुस्से और हक की लड़ाई का बड़ा मंच बन गई। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ईश्वर सिंह चाहल ने की, जबकि संचालन मंडल अध्यक्ष भूपेश चौधरी ने संभाला। बैठक में किसानों की ज्वलंत समस्याओं पर लंबी चर्चा हुई और प्रशासन के खिलाफ सख्त रणनीति बनाई गई।
बैठक खत्म होते ही सैकड़ों किसानों का हुजूम नारों के साथ कलेक्ट्रेट की ओर कूच कर गया। हाथों में झंडे, चेहरों पर आक्रोश और आवाज में जोश—पूरा माहौल आंदोलनमय हो गया। कलेक्ट्रेट पहुंचकर किसानों ने 12 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन शुरू किया, लेकिन स्थिति तब और गरमा गई जब जिलाधिकारी जसजीत कौर ज्ञापन लेने बाहर नहीं आईं।
इससे नाराज किसानों ने डीएम कार्यालय के सामने ही “पल्ला डालकर” धरना शुरू कर दिया। जमीन पर बैठकर किसानों ने जोरदार नारेबाजी की—“किसान विरोधी रवैया नहीं चलेगा”, “डीएम को बाहर आना होगा।” अधिकारियों ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक डीएम खुद नहीं आएंगी, तब तक धरना जारी रहेगा।
करीब काफी देर तक चले इस टकराव के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। जिलाधिकारी जसजीत कौर स्वयं बाहर आईं, किसानों से बातचीत की और उनका ज्ञापन स्वीकार किया। उन्होंने समस्याओं के जल्द समाधान का भरोसा दिया, जिसके बाद किसानों का आक्रोश कुछ शांत हुआ और धरना समाप्त किया गया।
किसानों द्वारा सौंपे गए 12 सूत्रीय ज्ञापन में कई अहम मुद्दे शामिल रहे। डीजल के बढ़ते दामों में कटौती, बाजार में बिक रहे खाद-बीज की गुणवत्ता की जांच, एमएसपी गारंटी कानून लागू करना, बिलाई शुगर मिल द्वारा गन्ना भुगतान जल्द कराना, बिजली विभाग द्वारा किसानों का उत्पीड़न रोकना और बढ़े हुए बिजली बिलों को कम करना प्रमुख मांगों में शामिल रहे।
इसके साथ ही खराब ट्रांसफार्मर बदलने, निर्बाध बिजली आपूर्ति देने, गांवों में जलभराव की स्थायी व्यवस्था, बरसात में टूटी सड़कों की मरम्मत, अवैध प्राइवेट अस्पतालों पर कार्रवाई, निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण और क्षेत्र में बढ़ते गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय किसान यूनियन (प्रधान) जिले में बड़ा आंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, जरूरत पड़ी तो सड़कों से लेकर कलेक्ट्रेट तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस दौरान संगठन के कई बड़े पदाधिकारी और नेता मौजूद रहे, कुल मिलाकर बिजनौर में आज का दिन किसान आंदोलन के नाम रहा, जहां भाकियू (प्रधान) ने साफ संदेश दे दिया कि अब किसानों के मुद्दों पर समझौता नहीं, बल्कि सीधी लड़ाई होगी।
बाइट:-राजेश प्रधान भाकियू (प्रधान) राष्ट्रीय अध्यक्ष