सरायकेला: एक दिन पूर्व ही उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला खनन टास्क फोर्स की बैठक में अवैध खनन एवं खनिज परिवहन पर प्रभावी रोकथाम के लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रशासन ने अवैध खनन के खिलाफ कड़ी निगरानी और कार्रवाई का दावा किया था। लेकिन गुरुवार सुबह कांड्रा थाना क्षेत्र में जो तस्वीर सामने आई, उसने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।कांड्रा थाना के सामने पुलिस द्वारा दोपहिया वाहन चालकों की सघन जांच की जा रही थी। हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन संबंधी दस्तावेजों की जांच के नाम पर कई मोटरसाइकिल चालकों को रोका गया। आरोप है कि कुछ लोगों को घंटों तक थाना परिसर में बैठाकर रखा गया, जिससे उन्हें कार्यस्थल पहुंचने में परेशानी हुई और ड्यूटी प्रभावित होने की आशंका बनी रही।जांच के दौरान कई मोटरसाइकिल चालकों ने पुलिसकर्मियों से उन्हें जाने देने का अनुरोध किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है।इसी बीच थाना के सामने से बालू लदे कई वाहन बिना किसी जांच के गुजरते रहे। इतना ही नहीं, थाना से महज लगभग 100 मीटर की दूरी पर खुलेआम बालू अनलोड किए जाने का मामला भी सामने आया। जब वाहन चालक से बालू के चालान के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि चालान वाहन मालिक के पास है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसकी सूचना कांड्रा थाना पुलिस को दिए जाने पर पुलिस ने इसे खनन विभाग का मामला बताते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।पुलिस का कहना था कि अवैध खनिज परिवहन की जांच और कार्रवाई खनन विभाग का विषय है।ग्रामीणों और मजदूरों में इसको लेकर नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि पुलिस की कार्रवाई का केंद्र केवल आम लोग और मजदूर बनते जा रहे हैं, जबकि क्षेत्र में खुलेआम हो रहे अवैध कारोबार पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि अवैध बालू परिवहन हो रहा है तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर चलने वाले मजदूर और आम नागरिक नियमों के नाम पर घंटों परेशान किए जाते हैं, जबकि अवैध परिवहन करने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ क्या कदम उठाते हैं।