सरायकेला: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सरायकेला-खरसावां की त्वरित पहल से बौद्धिक रूप से अक्षम एक महिला और उसकी लगभग दो वर्षीय बच्ची को समय पर चिकित्सा, सुरक्षा और संस्थागत संरक्षण उपलब्ध कराया गया।दोनों नए बस स्टैंड के समीप असहाय अवस्था में घूमते हुए मिले थे। इसकी सूचना पारा विधिक स्वयंसेविका (पीएलवी) तारामनी बंदिया ने डीएलएसए के सचिव तौसीफ मेराज को दी।सूचना मिलते ही सचिव ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया। इसके बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सैयद हैदर एवं जैदु करजी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (डीसीपीओ) संतोष कुमार, वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासिका पूर्णिमा नायक तथा चाइल्डलाइन की कविता मिश्रा के सहयोग से महिला और बच्ची को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया।महिला को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के लिए 17 जुलाई को रांची स्थित रिनपास भेजा गया है, जहां चिकित्सीय जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। वहीं बच्ची का इलाज सरायकेला सदर अस्पताल के एमटीसी (बाल रोग विभाग) में चल रहा है। जांच में उसका वजन सामान्य से कम पाया गया, जिसके बाद उसे विशेष पोषण और आवश्यक उपचार दिया जा रहा है।डीएलएसए ने कहा कि जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को समय पर विधिक सहायता, सुरक्षा और सरकारी सेवाओं से जोड़ना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह कार्रवाई संवेदनशील प्रशासन और विभिन्न विभागों के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।