दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा
सिद्धू-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से संबद्ध जामताड़ा महाविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2026-30 के स्नातक नामांकन के लिए जारी विषय सूची से बांग्ला विषय को हटाए जाने के बाद छात्रों और अभिभावकों में असंतोष का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में उन विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा, जो स्नातक स्तर पर बांग्ला विषय से पढ़ाई करना चाहते हैं। जामताड़ा जिला पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है और जिले के कई प्रखंडों व ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला भाषा का प्रयोग करते हैं। ऐसे में बांग्ला विषय यहां के विद्यार्थियों के लिए केवल एक वैकल्पिक विषय नहीं, बल्कि उनकी मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। विषय हटने के बाद छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।अभिभावकों का कहना है कि जामताड़ा पहले से ही शैक्षणिक संसाधनों के मामले में पिछड़ा जिला है। जिले में उच्च शिक्षा के विकल्प सीमित हैं और अधिकांश आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अपने बच्चों को दूसरे जिलों या दूसरे राज्यों में पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में यदि बांग्ला विषय की पढ़ाई स्थानीय महाविद्यालय में उपलब्ध नहीं होगी तो अनेक विद्यार्थियों को अपनी पसंद का विषय छोड़ने या फिर पढ़ाई के लिए बाहर जाना पड़ेगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि बांग्ला भाषा इस क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसे स्नातक स्तर से हटाना उचित नहीं है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और महाविद्यालय प्रबंधन से मांग की है कि विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रखते हुए बांग्ला विषय को पुनः नामांकन सूची में शामिल किया जाए। छात्रों ने भी कहा कि यदि जल्द ही इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो उन्हें अपनी उच्च शिक्षा की दिशा बदलनी पड़ेगी। लोगों का कहना है कि सीमावर्ती जिले की भाषाई और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए बांग्ला विषय को बनाए रखना आवश्यक है। अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।