मोतिहारी जिले के पताही प्रखंड अंतर्गत प्रदूमकेर पंचायत के नारायणपुर वार्ड संख्या 10 में नाली, गली और जलनिकासी की गंभीर समस्या से हजारों ग्रामीण वर्षों से परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एक परिवार के विरोध और अतिक्रमण के कारण पूरे वार्ड का विकास कार्य ठप पड़ा हुआ है, जिससे लगभग एक हजार घरों की आबादी जलजमाव, गंदगी और बदहाल सड़क की समस्या झेलने को मजबूर है। बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जब सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं और लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार वार्ड संख्या 10 में नाली निर्माण नहीं होने से घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है, बुजुर्गों को गिरने का डर बना रहता है और महिलाएं सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करती हैं। जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका भी बनी रहती है। कई ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से इस समस्या को लेकर पंचायत से लेकर प्रखंड और जिला स्तर तक गुहार लगाई गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
मुखिया प्रतिनिधि ने खोली समस्या की परतें
इस मामले को लेकर जब पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि शरोज सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कई अहम बातें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि यह नाली निर्माण कार्य बहुत पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन एक दबंग और उद्दंड व्यक्ति द्वारा लगातार बाधा उत्पन्न किए जाने के कारण कार्य नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि दो बार पंचायत स्तर पर योजना स्वीकृत हुई, लेकिन हर बार विरोध और विवाद के कारण काम रुक गया।
मुखिया प्रतिनिधि शरोज सिंह ने कहा कि उन्होंने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक इस समस्या को उठाया और प्रशासन से सहयोग मांगा, लेकिन अपेक्षित मदद नहीं मिली। उनका कहना था कि पंचायत प्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने हरसंभव प्रयास किया ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके, लेकिन अतिक्रमण और विवाद के कारण समस्या जस की तस बनी रही।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा तरह-तरह की बातें फैलाई जाती हैं। कोई कहता है कि संबंधित व्यक्ति किसी बड़े नेता या मंत्री से जुड़ा हुआ है, तो कोई कहता है कि मंत्री के लेटर पैड पर काम रोकने की अनुशंसा की गई थी। हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ऐसी चर्चाओं ने मामले को और जटिल बना दिया है।
“एक व्यक्ति के कारण हजारों लोगों का हित प्रभावित”
मुखिया प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह एक व्यक्ति के कारण हजारों ग्रामीणों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पंचायत का दायित्व सभी लोगों के विकास और सुविधा को सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ग्रामीणों के आग्रह पर हाल ही में फिर से पंचायत स्तर पर बैठक की गई, जिसमें अधिकारियों और सहयोगियों के साथ इस समस्या के समाधान पर चर्चा हुई।
उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि नाली निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कराने के लिए प्रयास किया जाएगा और प्रशासनिक स्तर पर फिर से पहल की जाएगी। उनका कहना था कि यदि प्रशासन का सहयोग मिला तो जल्द ही समाधान निकल सकता है।
प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करता तो समस्या वर्षों पहले समाप्त हो सकती थी। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पंचायत प्रतिनिधियों का भी कहना है कि बिना प्रशासनिक सहयोग के अतिक्रमण हटाना संभव नहीं है।
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि जब भी नाली निर्माण की बात आगे बढ़ती है, विवाद खड़ा हो जाता है और काम रुक जाता है। इससे लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर कब तक एक व्यक्ति के कारण पूरे गांव को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
बरसात में बन जाती है भयावह स्थिति
नारायणपुर वार्ड संख्या 10 की सबसे बड़ी समस्या जलनिकासी की है। नाली नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों और गलियों में जमा हो जाता है। कई जगहों पर कीचड़ और बदबू के कारण लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों के कपड़े रोज गंदे हो जाते हैं और स्कूल जाने में दिक्कत होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है। एंबुलेंस तक कई बार मोहल्ले में नहीं पहुंच पाती। बरसात के मौसम में स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि लोगों को घरों में कैद होकर रहना पड़ता है।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई लोगों ने कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता की समस्याएं भूल जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कुछ ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार प्रयास किया, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के कारण सफलता नहीं मिली। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि पंचायत और प्रशासन दोनों को मिलकर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
आखिर दोषी कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इस समस्या के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
क्या पंचायत प्रतिनिधि दोषी हैं, जो कार्य पूरा नहीं करा सके?
क्या प्रशासन दोषी है, जिसने समय रहते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं की?
क्या स्थानीय जनप्रतिनिधि और विधायक दोषी हैं, जिन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंभीर पहल नहीं की?
या फिर बिहार सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठता है, जहां एक गांव की मूलभूत समस्या वर्षों तक अनसुलझी रह जाती है?
ग्रामीणों का कहना है कि दोष तय करना प्रशासन और सरकार का काम है, लेकिन आम जनता केवल इतना चाहती है कि उनकी समस्या का समाधान हो और उन्हें सामान्य जीवन जीने की सुविधा मिले।
समाधान की उम्मीद अभी बाकी
हालांकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या के बीच अब एक बार फिर समाधान की उम्मीद जगी है। पंचायत स्तर पर समीक्षा बैठक होने और पुनः प्रयास की बात सामने आने से ग्रामीणों को उम्मीद है कि शायद इस बार कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अतिक्रमण हटाया जाए और जल्द से जल्द नाली निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि विकास कार्य किसी व्यक्ति विशेष के कारण नहीं रुकना चाहिए।
नारायणपुर वार्ड संख्या 10 की यह समस्या केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास व्यवस्था की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को वर्षों तक संघर्ष करना पड़ता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ सकता