बिरनी/गिरिडीह

गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड में शनिवार को राजनीति ने नया मोड़ ले लिया। भाजपा के जिला कार्यकारिणी सदस्य नारायण पाण्डेय ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित संगठन के सभी दायित्वों से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी छोड़ने की घोषणा की, जिससे जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

यह पहला मौका नहीं है जब नारायण पाण्डेय ने भाजपा से दूरी बनाई है। इससे पहले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भी उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन चुनाव को देखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के आग्रह पर वे पार्टी में लौट आए थे। इस बार उन्होंने साफ कर दिया है कि उनका फैसला अंतिम है।

प्रेस वार्ता के दौरान नारायण पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने अपना लिखित इस्तीफा भाजपा के गिरिडीह जिलाध्यक्ष को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी आवेश में नहीं, बल्कि लंबे आत्ममंथन और विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।

करीब 14 वर्षों तक भाजपा में सक्रिय रहे नारायण पाण्डेय जिला सांसद प्रतिनिधि, प्रखंड पाल और वर्तमान में जिला कार्यकारिणी सदस्य जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं। इससे पहले वे आजसू पार्टी के गिरिडीह जिलाध्यक्ष और जिला परिषद सदस्य भी रह चुके हैं। क्षेत्र में उनकी पहचान एक सक्रिय और जनसरोकारों से जुड़े नेता के रूप में रही है।

अपने त्यागपत्र में उन्होंने संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों तक पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और उनकी भावनाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्ति विशेष, पद या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण नहीं, बल्कि स्वाभिमान, सिद्धांतों और कार्यकर्ताओं के सम्मान की रक्षा के लिए है।

प्रेस वार्ता में मौजूद सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी नारायण पाण्डेय के समर्थन में भाजपा छोड़ने की घोषणा की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे आगे भी हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे। एक साथ बड़ी संख्या में हुए इस्तीफों ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।

फिलहाल नारायण पाण्डेय ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि उचित समय आने पर आगे की रणनीति सार्वजनिक की जाएगी। लेकिन इतना तय है कि बिरनी और आसपास के क्षेत्रों में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को देखते हुए यह इस्तीफा भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नारायण पाण्डेय की अगली राजनीतिक पारी किस दल के साथ शुरू होगी