खोजी पड़ताल:शहर के सबसे व्यस्त कमर्शियल हब 'सिटी सेंटर' में दो साल तो उपायुक्त कार्यालय के पास स्थित 'मिश्रित भवन' में 5 साल पहले खत्म हो चुकी है फायर सेफ्टी उपकरणों की वैलिडिटी।
बड़ा खुलासा: नियमों को ताक पर रखकर हजारों लोगों की जान से हो रहा है खिलवाड़; कबाड़ बन चुके हैं आग बुझाने वाले सिलेंडर।
गोवर्धन रजक/धनबाद: दिल्ली और बिहार के अस्पतालों व होटलों में हुए हालिया अग्निकांडों से भी कोयलांचल के जिम्मेदार महकमों और निजी संचालकों ने कोई सबक नहीं लिया है। धनबाद के सबसे व्यस्त व्यावसायिक परिसरों, मॉल और खुद सरकारी दफ्तरों में अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) व्यवस्था सिर्फ दिखावा साबित हो रही है। हमारी ग्राउंड रिपोर्टिंग में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि जिन उपकरणों के भरोसे हजारों लोगों की जान सुरक्षित मानी जा रही है, वे खुद 'एक्सपायरी डेट' के हो चुके हैं।
सिटी सेंटर' में कबाड़ हो चुके सिलेंडरों से बुझेगी आग?
शहर का दिल कहे जाने वाले 'सिटी सेंटर' कॉम्प्लेक्स के भूतल पर बड़े मॉल, रेस्टोरेंट और सैकड़ों दुकानें हैं, जबकि ऊपरी तलों पर दर्जनों नामी कोचिंग संस्थान और चिकित्सा केंद्र संचालित होते हैं। यहां रोजाना हजारों की संख्या में छात्र, अभिभावक और ग्राहक पहुंचते हैं।
इस बहुमंजिला इमारत में जब फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन सिलेंडरों) की पड़ताल की गई, तो रोंगटे खड़े कर देने वाली हकीकत सामने आई। यहां लगे कई सिलेंडरों की रिफिलिंग की अंतिम तारीख दो से ढाई साल पहले ही समाप्त हो चुकी है। कई उपकरणों पर जंग लग चुका है। परिसर में पढ़ने वाले छात्र रितेश कुमार ने बताया कि यहां कभी किसी ने सुरक्षा उपकरणों की जांच होते नहीं देखी। यदि शॉर्ट सर्किट से आग लग जाए, तो इन एक्सपायरी सिलेंडरों के भरोसे किसी की जान नहीं बचाई जा सकती।
मिश्रित भवन का हाल: 5 साल से सर्विसिंग की बाट जोह रहे उपकरण
लापरवाही का यह खेल सिर्फ निजी भवनों तक सीमित नहीं है। सरकारी तंत्र की नाक के नीचे स्थित धनबाद का
मिश्रित भवन', जहां खुद उपायुक्त (डीसी) कार्यालय समेत बिजली विभाग, खनन विभाग और शिक्षा विभाग जैसे महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर हैं, वहां के हालात और भी भयावह हैं।
मिश्रित भवन के गलियारों में टांगे गए फायर एक्सटिंग्विशर की जांच में सामने आया कि इनकी आखिरी रिफिलिंग साल 2021 में हुई थी। इसके बाद दोबारा इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं रहा। यानी पांच वर्षों से यहां सिर्फ कागजों पर सुरक्षा चल रही है।
एक साल से पुराना सिलेंडर बन जाता है निष्क्रिय: अग्निशमन प्रभारी
धनबाद अग्निशमन विभाग के प्रभारी लक्ष्मण प्रसाद ने इस गंभीर लापरवाही पर चिंता जताते हुए बताया कि फायर एक्सटिंग्विशर की नियमित जांच और प्रतिवर्ष रिफिलिंग अनिवार्य है। उन्होंने कहा:
नियमानुसार एक वर्ष से अधिक समय तक सर्विसिंग नहीं होने पर इन उपकरणों के अंदर का प्रेशर और केमिकल निष्क्रिय हो जाता है। ऐसी स्थिति में आपातकाल के दौरान ये उपकरण काम नहीं करते और एक छोटी सी चिंगारी भी विकराल हादसे का रूप ले लेती है।"
डिजिटल डेस्क से बड़ा सवाल: आखिर कौन कर रहा है फायर सेफ्टी ऑडिट?
बड़ा सवाल यह है कि जिले में फायर सेफ्टी ऑडिट की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं? मॉल और सरकारी भवनों में रखे ये एक्सपायरी उपकरण यह साफ बताते हैं कि जनता की सुरक्षा को लेकर तंत्र कितना लापरवाह है। जिला प्रशासन को तुरंत जिले की तमाम ऊंची और व्यावसायिक इमारतों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराना चाहिए और लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।