सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया
रांची: हज़रत इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला की याद में मोहर्रम के अवसर पर राजधानी रांची में शिया समुदाय द्वारा जुलूस ए आशूर शांतिपूर्ण तरीके से निकाला गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंजुमन जाफरिया के तत्वावधान में आयोजित इस पारंपरिक मातमी जुलूस में हजारों अज़ादारों ने शामिल होकर इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद किया। जुलूस के दौरान नौहाख़्वानी, सीना ज़नी और जंजीरी मातम के जरिए कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
*मजलिस-ए-आशूर में दिया इंसानियत और अमन का संदेश*
जुलूस से पूर्व मस्जिद जाफरिया में नमाज़-ए-जुमा अदा की गई। इसके बाद मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने संदेश देते हुए कहा कि हज़रत इमाम हुसैन की शहादत किसी एक मज़हब या फिरके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सत्य, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी हमें हर परिस्थिति में हक और इंसाफ का साथ देने तथा ज़ुल्म के सामने कभी न झुकने की प्रेरणा देती है।
*पारंपरिक मार्गों से निकला मातमी जुलूस*
मजलिस के बाद ताबूत, अलम और झूला के साथ जुलूस मस्जिद जाफरिया से रवाना हुआ। विक्रांत चौक पर अज़ादारों ने पुरसोज़ नौहाख़्वानी और सीना ज़नी की। इसके बाद जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होते हुए टैक्सी स्टैंड पहुंचा, जहां विभिन्न संगठनों और गणमान्य लोगों ने श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।
*विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने किया स्वागत*
जुलूस के स्वागत के लिए सेंट्रल मुहर्रम कमेटी, जिला प्रशासन, महावीर मंडल, मरहबा ह्यूमन सोसाइटी, अंजुमन इस्लामिया रांची, मॉर्निंग ग्रुप, इमाम बख्श अखाड़ा, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित अनेक सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों ने स्वागत शिविर लगाए। शिविरों में अज़ादारों के लिए पेयजल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई। विभिन्न धर्मों के लोगों द्वारा किए गए स्वागत ने सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
*जंजीरी मातम कर हज़रत इमाम हुसैन को किया गया याद*
जुलूस के दौरान मशहूर नौहाख़्वान अमीर गोपालपुरी, कासिम अली और असगर अली ने संयुक्त रूप से नौहाख़्वानी पेश की। अंजुमन जाफरिया के मातमी दस्ते ने पूरे जुलूस का अनुशासित ढंग से नेतृत्व किया। अज़ादारों ने जंजीरी मातम कर हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए अपने गम और अकीदत का इज़हार किया।
*भाईचारे का दिया गया संदेश*
मौलाना सैयद तहज़ीबुल हसन रिज़वी ने कहा कि इस्लाम में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। मुहर्रम का संदेश अमन, भाईचारा, त्याग और वतन से मोहब्बत का है। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। भारत की गंगा जमुनी तहज़ीब और धार्मिक सहिष्णुता पूरी दुनिया के लिए मिसाल है।