सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया विशेष संवाददाता

रांची:झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए हो रहे चुनाव को लेकर नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी को हरी झंडी मिल गई। उनके नामांकन पत्र पर उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को वैध घोषित कर दिया। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव का मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।

*रिटर्निंग ऑफिसर ने परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध करार दिया*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के दौरान नाथवानी के नामांकन से जुड़े तीन बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इन आपत्तियों के मद्देनजर विधानसभा प्रभारी सचिव एवं राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार ने उनके नामांकन को तत्काल मंजूरी देने के बजाय आवश्यक स्पष्टीकरण मांगा था। बाद में नाथवानी की ओर से संबंधित दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत किए गए। जवाबों का परीक्षण करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर संतुष्ट हुए और उनके नामांकन पत्र को वैध घोषित कर दिया। इसके साथ ही कांग्रेस द्वारा दर्ज कराई गई सभी आपत्तियों को भी निरस्त कर दिया गया।

*राज्यसभा के चुनावी दंगल में तीन प्रत्याशी है आमने सामने*
नामांकन जांच प्रक्रिया  की पूरी होने के बाद अब राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से बैद्यनाथ राम और प्रणव झा शामिल हैं, जबकि तीसरे उम्मीदवार के रूप में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी चुनावी मैदान में बने हुए हैं। परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी को मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चुनावी गणित और संभावित रणनीतियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब सभी की निगाहें मतदान और विधायकों की प्राथमिकता आधारित वोटिंग पर टिकी हुई हैं।

*सत्ता पक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल*
झारखंड विधानसभा के वर्तमान संख्याबल पर नजर डालें तो इंडिया गठबंधन यानी कि महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। झामुमो, कांग्रेस, राजद और सहयोगी दलों को मिलाकर गठबंधन के पास लगभग 56 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए यह संख्या दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करते हैं और कोई अप्रत्याशित परिस्थिति नहीं बनती है, तो दोनों उम्मीदवारों की जीत का रास्ता आसान हो सकता है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष लगातार अपने विधायकों के साथ समन्वय बनाए रखने में जुटा हुआ है।

*परिमल नाथवानी की एंट्री से दिलचस्प हुआ मुकाबला*
दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की एंट्री ने चुनाव को एकतरफा होने से रोक दिया है। एनडीए के पास विधानसभा में करीब 24 विधायक हैं  ऐसे में नाथवानी को जीत दर्ज करने के लिए और चार विधायकों की समर्थन की आवश्यकता होगी। वहीं,राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकता वोटों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में विभिन्न दलों के विधायकों की मतदान रणनीति और वोटों का ट्रांसफर चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि चुनावी गणित को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

*क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज*
नाथवानी की उम्मीदवारी बरकरार रहने के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि किसी भी दल की ओर से इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई संकेत नहीं दिया गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लगे हुए हैं।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में अक्सर दलों की रणनीति अंतिम समय तक गोपनीय रखी जाती है। इसलिए मतदान से पहले किसी भी संभावित समीकरण पर निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

*अब नाम वापसी और मतदान पर नजर*
नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें नाम वापसी की प्रक्रिया और मतदान की तारीख पर हैं। यदि तीनों उम्मीदवार चुनाव मैदान में बने रहते हैं तो राज्यसभा चुनाव में मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। हालांकि अंतिम परिणाम विधायकों के मतदान व्यवहार, प्राथमिकता वोटों के वितरण और राजनीतिक दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा।फिलहाल इतना तय है कि परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी को मंजूरी मिलने के बाद झारखंड का राज्यसभा चुनाव राजनीतिक दृष्टि से पहले की तुलना में अधिक चर्चित और दिलचस्प हो गया है। सत्ता पक्ष जहां अपने संख्याबल के भरोसे दोनों सीटों पर जीत का दावा कर रहा है, वहीं विपक्ष समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में बने रहने से चुनावी उत्सुकता और बढ़ गई है।