दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा
सावित्री देवी डीएवी पब्लिक स्कूल, जामताड़ा में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न पाठ्य सहगामी गतिविधियों का आयोजन किया गया। आयोजित प्रतियोगिताओं में नन्हे बच्चों से लेकर वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी कला, लेखन एवं बौद्धिक क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्टून में रंग भरे प्रतियोगिता के एलकेजी वर्ग में आदर्श राज ने प्रथम, भुवेश कुमार बाउरी ने द्वितीय तथा पीयूष कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। यूकेजी वर्ग में स्नेहाशीष पाल प्रथम, सुहानी कुमारी द्वितीय तथा सान्वी कुमारी तृतीय रहीं। पहली एवं दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इसी प्रतियोगिता में प्रियांशी कुमारी प्रथम, इरशाद अंसारी द्वितीय तथा शिवांश मंडल तृतीय स्थान पर रहे। तीसरी से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित हेलेन केलर पर निबंध लेखन प्रतियोगिता में श्रेष्ठा राज ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। आशीष हांसदा एवं तन्वी दास संयुक्त रूप से द्वितीय तथा सुहानी कुमारी तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं छठी एवं सातवीं कक्षा के लिए आयोजित 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता' विषयक निबंध लेखन प्रतियोगिता में अदिति कुमारी प्रथम, सौम्या आनंद द्वितीय तथा कुमारी चाहत तृतीय स्थान पर रहीं। आठवीं, नौवीं एवं ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता में आराध्या सिंह प्रथम, कुमार अर्घ्यदीप द्वितीय, प्रियांशी प्रिया तृतीय तथा सृष्टि प्रिया चतुर्थ स्थान पर रहीं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय कुमार ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि पाठ्य सहगामी गतिविधियां विद्यार्थियों में नेतृत्व, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति कौशल का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि निबंध लेखन से भाषा एवं विषय की समझ मजबूत होती है, जबकि महान व्यक्तित्वों की जीवनी विद्यार्थियों को जीवन में संघर्ष कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने हेलेन केलर के संघर्षपूर्ण जीवन को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रभारी प्रदीप्तो दास तथा निर्णायक आनंद विश्वकर्मा, अनित मंडल, देवाशीष दास, फरीदा अंजुम, संजीव सिंह, शांतनु चक्रवर्ती, कमलेश प्रसाद, मीठु कुमारी, सुपर्णा राय, शांता पाल एवं मधुलिका मंडल सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।