रफ्तार मीडिया/ गिरिडीह: सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सूचना अधिकार कार्यकर्ता सुनील खंडेलवाल के द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इस संबंध में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार के सचिव को एक विस्तृत पत्र भेजकर यह मांग की गई है कि ₹ 20 से कम शुल्क वाली सूचनाओं को निःशुल्क उपलब्ध कराने हेतु स्पष्ट नीति बनाई जाए। प्रेस को जारी बयान में बताया गया है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत सूचना की प्रमाणित प्रति हेतु ₹ 2 प्रति पृष्ठ शुल्क निर्धारित है। किन्तु व्यवहारिक स्तर पर यह व्यवस्था अत्यंत अव्यावहारिक सिद्ध हो रही है। कई मामलों में कुल शुल्क ₹2, ₹4 या ₹10 तक सीमित होता है, लेकिन इस छोटी राशि के भुगतान के लिए आवेदक को ₹10 का पोस्टल ऑर्डर खरीदना पड़ता है, साथ ही ₹50–₹60 तक डाक खर्च भी वहन करना पड़ता है। इस प्रकार मात्र ₹2 या ₹4 की सूचना प्राप्त करने के लिए नागरिकों को ₹60–₹70 तक खर्च करना पड़ता है, जो न केवल आर्थिक रूप से अनुचित है बल्कि सूचना के अधिकार की भावना के भी विपरीत है। इसके अतिरिक्त, जन सूचना पदाधिकारियों को भी इतनी अल्प राशि की वसूली एवं लेखांकन में अनावश्यक समय एवं संसाधन खर्च करने पड़ते हैं, जिससे सरकारी तंत्र पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ता है। जनप्रतिनिधियों एवं जागरूक नागरिकों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि यह व्यवस्था लागू होने से सूचना का अधिकार अधिनियम और अधिक जनोन्मुखी एवं व्यवहारिक बनेगा।