आशीष कुमार मुखर्जी/कुजू (रामगढ़): कुजू पूर्वी स्थित सरना स्थल पर मंगलवार को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी , वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वनों का वैज्ञानिक रख-रखाव और जंगल से प्राप्त होने वाले उत्पादों के जरिए ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना था। उससे पूर्व इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी , वन विभाग प्रखंड क्षेत्र के रतवे और करमा में भी बैठक की । 
*संसाधनों के सही मूल्य पर जोर*
बैठक में मुख्य रूप से महुआ और कुड़ी (महुआ के फल) की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा हुई। डीएफओ नीतीश कुमार ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि जंगल सिर्फ लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह आजीविका का बड़ा आधार हैं। उन्होंने महुआ के संग्रहण, उसके प्रसंस्करण और बाजार व्यवस्था को लेकर नई रणनीतियों की जानकारी दी।
*गोदाम निर्माण की योजना*
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण उत्पादों के रखरखाव के लिए गोदाम (स्टोरेज) की व्यवस्था रहा। ग्रामीणों ने मांग रखी कि उचित भंडारण न होने के कारण उन्हें अपनी उपज सस्ते दामों पर बिचौलियों को बेचनी पड़ती है।  जेआईसीए की टीम और वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के लिए गोदाम की व्यवस्था किस प्रकार किया जाएगा ।
*प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों की उपस्थिति*
कार्यक्रम में मुख्य रूप से आरएफओ बी. पासवान, रेंजर पवन अग्रवाल, मुकेश मुंडा, अजीत कुमार और संजय कुमार महतो उपस्थित थे। स्थानीय स्तर पर वन समिति के अध्यक्ष रंजीत कुमार साहू, मुखिया प्रतिनिधि अशोक कुमार, महेश महतो और वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सुखराम टुडू ने भी अपने विचार साझा किए।
*ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी*
इस चौपाल में रामलाल मांझी, सुखराम मांझी, संजू मांझी, बरसा मांझी, राजू करमाली, लालदेव सोरेन, नरेश बास्के ,सहित भारी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। महिलाओं में नेहा कुमारी, सरिता देवी, तालुमुनि देवी, प्रीति कुमारी और पार्वती देवी ने वनोपज से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया।
बैठक के अंत में वन समिति ने संकल्प लिया कि वे न केवल वनों की रक्षा करेंगे, बल्कि जेआईसीए के सहयोग से अपनी पारंपरिक उपज को वैश्विक बाजार तक ले जाने का प्रयास करेंगे।