चंडीगढ़ / रवीन्द्र कुमार: वन एवं वन्यजीव विभाग, यूटी चंडीगढ़ द्वारा स्कूल परिसरों में स्थित मृत, खतरनाक एवं खोखले पेड़ों की वैज्ञानिक पहचान तथा जोखिम मूल्यांकन के संबंध में एक तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
   कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रारंभिक पहचान तंत्र को सुदृढ़ करना तथा संस्थागत स्तर पर पेड़ों के व्यवस्थित जोखिम आकलन की क्षमता विकसित करना था, ताकि तेज हवाओं, भारी वर्षा एवं अत्यधिक मौसमीय परिस्थितियों के दौरान पेड़ों के गिरने की घटनाओं की रोकथाम की जा सके। विचार-विमर्श के दौरान वृक्ष-विज्ञान (Arboriculture) आधारित आकलन तकनीकों, संरचनात्मक दोषों की पहचान तथा विजुअल ट्री असेसमेंट (VTA) पद्धति पर विस्तार से चर्चा की गई।
  तकनीकी सत्र में पेड़ों के शारीरिक एवं संरचनात्मक क्षरण के संकेतकों की पहचान पर विशेष बल दिया गया, जिनमें छत्रभाग (क्राउन) का सूखना, छाल का अलग होना, कवकीय वृद्धि (फंगल फ्रूटिंग बॉडी) की उपस्थिति, तनों में गुहाएँ (कैविटी), दरारें, जड़-तंत्र की अस्थिरता तथा असामान्य झुकाव शामिल हैं। प्रतिभागियों को मृत शाखाओं एवं संरचनात्मक रूप से कमजोर शाखाओं के बीच अंतर स्पष्ट करने तथा बाहरी दृश्य संकेतों के आधार पर खोखले तनों एवं आंतरिक सड़न का आकलन करने का प्रशिक्षण दिया गया।
    वृक्ष की स्थिरता का मूल्यांकन करते समय भार वितरण, छत्र संतुलन एवं जड़ों की पकड़ (रूट एंकरिज) को समझने पर भी जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, समयबद्ध रिपोर्टिंग तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय के प्रोटोकॉल पर चर्चा की गई, ताकि आवश्यकता अनुसार छंटाई (Pruning), केबलिंग, ब्रेसिंग अथवा पेड़ों को हटाने जैसे शमनात्मक उपाय समय पर किए जा सकें।
    कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों एवं इको क्लब प्रभारी शिक्षकों ने भाग लिया। उन्हें अपने-अपने संस्थानों में आंतरिक निगरानी तंत्र विकसित करने तथा परिसर प्रबंधन योजना में नियमित वृक्ष स्वास्थ्य ऑडिट को शामिल करने हेतु प्रोत्साहित किया गया।
    तकनीकी सत्र प्रोफेसर सतीश नरूला, सेवानिवृत्त प्रोफेसर (उद्यानिकी) द्वारा संचालित किया गया, जिन्होंने शहरी पेड़ों को प्रभावित करने वाले जैविक एवं अजैविक तनाव कारकों के निदानात्मक संकेतकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। मेजर जनरल बेवली (सेवानिवृत्त) ने सभा को संबोधित करते हुए तैयारी, संरचित निरीक्षण कार्यक्रम एवं समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि संभावित जोखिमों को न्यूनतम किया जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुप कुमार सोनी, वन संरक्षक, यूटी चंडीगढ़ ने की , अभियांत्रिकी विभाग के उद्यानिकी प्रकोष्ठ तथा नगर निगम के अधिकारियों ने भी भाग लिया, जिससे शहरी वृक्ष जोखिम प्रबंधन एवं जन-सुरक्षा के क्षेत्र में अंतर्विभागीय समन्वय की महत्ता पर बल मिला। विभाग ने चंडीगढ़ में वैज्ञानिक शहरी वानिकी प्रथाओं को बढ़ावा देने, जोखिम न्यूनीकरण सुनिश्चित करने तथा जन-सुरक्षा के साथ-साथ हरित संपदा के संरक्षण हेतु अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।