सौरभ राय/रफ्तार मीडिया

रांची: 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच आजसू पार्टी ने सीआईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने आरोप लगाया कि मामले में केवल "छोटी मछलियों" पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि मुख्य आरोपितों को बचाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी नहीं होने पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग दोहराई।

जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष पर लगाया गया संगीन आरोप

प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि यदि पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आवास पर सीआईडी ने छापेमारी की है, तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएससी में खियांग्ते की मनमानी और तानाशाही चल रही थी तथा आयोग के अन्य सदस्यों को दरकिनार कर एक गिरोह की तरह काम किया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी से परीक्षा संबंधी कार्य कराए गए, जिससे पूरे चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

शराब घोटाले में भी सीबीआई से जांच नहीं कराकर मुख्य दोषियों को बचाया गया

वहीं, प्रवीण प्रभाकर ने राज्य सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा  कि राज्य सरकार पहले भी चर्चित शराब घोटाले में सीबीआई जांच कराने से बचती रही और राज्य की एजेंसियों से जांच कराकर "बड़ी मछलियों" को बचाने का काम किया गया। अब 14वीं जेपीएससी मामले में भी सरकार उसी कार्यशैली पर चल रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि हेमंत सरकार निष्पक्ष है, तो उसे सीबीआई जांच से परहेज क्यों है।आजसू नेता ने कहा कि केवल 14वीं जेपीएससी ही नहीं, बल्कि जेट, एपीपी, सिविल जज, वन विभाग सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी संदेह के दायरे में 
हैं।