उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि कानून ने अपना काम पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ किया है। इस मामले में उत्तराखंड पुलिस के अपर महानिदेशक (ADGP) ने कहा है कि अब तक जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आए, उनके आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर भविष्य में कोई नया तथ्य या सबूत सामने आता है, तो उस पर तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी

ADGP ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील रहा है और सरकार व पुलिस दोनों की प्राथमिकता शुरू से ही पीड़िता को न्याय दिलाना रही है। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया के दौरान किसी भी दबाव, राजनीतिक प्रभाव या बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया गया। पुलिस ने तथ्यों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप जांच पूरी की और आरोपियों के खिलाफ अदालत में मजबूत केस पेश किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र है और अदालत के फैसले का सभी को सम्मान करना चाहिए। ADGP के मुताबिक, पुलिस का काम निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाना है, और यह जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई गई है। अगर आगे चलकर किसी गवाह, दस्तावेज़ या तकनीकी सबूत के रूप में कोई नई जानकारी सामने आती है, तो पुलिस उस पर दोबारा जांच करने से पीछे नहीं हटेगी।

अंकिता भंडारी केस ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। एक युवा महिला के साथ हुई इस जघन्य घटना ने महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर संरक्षण और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस संदर्भ में ADGP ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना जरूरी है ताकि समाज में एक स्पष्ट संदेश जाए कि अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस अधिकारी ने आम जनता से भी अपील की कि वे अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से बचें। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट खबरें न केवल जांच को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि पीड़ित परिवार की पीड़ा भी बढ़ाती हैं। उन्होंने कहा कि न्याय पाने की प्रक्रिया समय ले सकती है, लेकिन कानून के दायरे में रहकर ही न्याय स्थायी और भरोसेमंद होता है

ADGP के बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन इस मामले को लेकर अब भी सतर्क है और किसी भी नई जानकारी को गंभीरता से लेने के लिए तैयार है। सरकार और पुलिस दोनों यह संदेश देना चाहती हैं कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लड़ाई केवल एक केस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा और कानून के राज को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

, पुलिस प्रशासन का रुख साफ है— कानून ने अपना काम किया है, लेकिन अगर सच का कोई नया पहलू सामने आता है, तो कार्रवाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था और न्याय प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है।