कासगंज। जनपद के ग्राम पंचायत मोहनी में राशन की दुकान के आवंटन को लेकर छिड़ा विवाद अब जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। ग्रामीणों ने मृतक आश्रित के कोटे के तहत नीलम देवी को दुकान आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और पूर्व में हुए घोटालों की जांच के लिए जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरी आवंटन प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर धांधली की जा रही है।
पूर्व डीलर पर फर्जीवाड़े और घटतौली के गंभीर आरोप
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इससे पूर्व राशन दुकान का संचालन करने वाले चंद्रवीर ने फर्जी शैक्षिक प्रमाण-पत्रों के आधार पर दुकान हासिल की थी। इतना ही नहीं, ग्रामीणों के पास पूर्व डीलर द्वारा राशन वितरण में की जाने वाली घटतौली (कम राशन तोलने) के पुख्ता वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।
इसके साथ ही, ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी आक्रोश है कि गांव में राशन का वितरण कभी भी समय पर नहीं किया जाता, जिससे गरीब कार्डधारकों को समय से राशन न मिलने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
धारा-144 के कारण टल गई थी खुली बैठक
मामले के समाधान के लिए बीते 25 मई को गांव में एक खुली बैठक बुलाई गई थी। लेकिन क्षेत्र में धारा-144 लागू होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर इस बैठक को स्थगित कर दिया गया था। बैठक टलने के बाद से ही ग्रामीणों में निष्पक्ष कार्रवाई को लेकर अंदेशा बना हुआ था, जिसके बाद उन्होंने एकजुट होकर सीधे जिलाधिकारी की चौखट पर दस्तक दी।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:
दस्तावेजों की जांच: मृतक आश्रित के रूप में दावेदारी पेश कर रहीं नीलम देवी के सभी शैक्षणिक और अन्य दस्तावेजों की गहनता से स्क्रूटनी की जाए।
शासनादेश के तहत आवंटन: राशन की दुकान का आवंटन किसी बंद कमरे या मनमाने ढंग से न होकर, शासनादेश के नियमों के अनुसार पूरे गांव के सामने 'खुली बैठक' के माध्यम से ही कराया जाए।
दोषियों पर कार्रवाई: पूर्व में हुए घटतौली के मामलों और फर्जी प्रमाण-पत्र के आरोपों की जांच कर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का रुख: "राशन गरीबों का हक है और इसमें किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ खुली बैठक की तारीख तय नहीं करता और जांच पूरी नहीं होती, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा।"
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्षता से कदम उठाएगा और गांव के पात्र परिवारों को उनका हक सही तरीके से मिल सकेगा