सौरभ राय/रफ्तार मीडिया
राँची:प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), झारखंड, राँची के तत्वावधान में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), कार्यालय 3, राँची की प्रथम छमाही बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) चन्द्र मौलि सिंह ने की। इसमें क्षेत्रीय कार्यान्वयन कार्यालय, कोलकाता के उप निदेशक (कार्यान्वयन) विचित्रसेन गुप्त समेत नराकास के 34 सदस्य कार्यालयों के अधिकारी एवं प्रतिनिधि शामिल हुए।बैठक में सदस्य कार्यालयों में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग एवं क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही भारत सरकार की राजभाषा नीति के प्रभावी अनुपालन को लेकर विस्तार से विचार विमर्श किया गया। कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ ई ऑफिस एवं डिजिटल माध्यमों में हिन्दी के उपयोग, हिन्दी पत्राचार, राजभाषा प्रशिक्षण और विभिन्न हिन्दी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।

छमाही राजभाषा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई

सदस्य कार्यालयों के प्रतिनिधियों ने अपने अपने कार्यालयों में राजभाषा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, नवाचारों एवं बेहतर कार्यप्रणालियों की जानकारी साझा की। इस दौरान इन कार्यों को अन्य कार्यालयों में भी अपनाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।बैठक में नराकास के सदस्य सचिव सह सहायक निदेशक (राजभाषा) सुनील कुमार साव ने छमाही राजभाषा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के माध्यम से सदस्य कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग की प्रगति, उपलब्धियों एवं क्रियान्वयन की स्थिति से सदस्यों को अवगत कराया गया। आगामी अवधि में हिन्दी के प्रयोग को और बढ़ाने के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई।

आगामी गतिविधियों पर हुई चर्चा

बैठक में नराकास की आगामी गतिविधियों की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई। इसमें राजभाषा पत्रिका का प्रकाशन एवं संपादकीय मंडल का गठन, राजभाषा कार्यशालाओं का आयोजन, सदस्य कार्यालयों में एक-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, हिन्दी प्रतियोगिताएं, हिन्दी दिवस एवं हिन्दी पखवाड़ा के दौरान नवोन्मेषी कार्यक्रम तथा संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षण से संबंधित तैयारियां शामिल हैं।

हिन्दी के प्रयोग को और अधिक प्रोत्साहित करने का किया आह्वान

अध्यक्षीय संबोधन में चन्द्र मौलि सिंह ने सदस्य कार्यालयों से हिन्दी के प्रयोग को और अधिक प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजभाषा का कार्य केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हिन्दी को कार्यालयीन कार्यप्रणाली का स्वाभाविक हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सदस्य कार्यालयों के बीच समन्वय, अनुभवों के आदान प्रदान एवं सामूहिक प्रयासों को राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक बताया।

राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए

उप निदेशक (कार्यान्वयन) विचित्रसेन गुप्त ने राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने सदस्य कार्यालयों के प्रयासों की सराहना करते हुए कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को निरंतर बढ़ाने पर बल दिया।बैठक के अंत में सदस्य कार्यालयों से राजभाषा हिन्दी के प्रयोग को व्यवहारिक एवं प्रभावी बनाने तथा नराकास की आगामी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।