राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन-CPA) इंडिया रीजन ज़ोन-II उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के तत्वावधान में चंडीगढ़ में "विकसित भारत-2047 के लक्ष्य एवं भविष्य की चुनौतियों को साकार करने में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की भूमिका" विषय पर विशेष विचार-विमर्श आयोजित किया गया। इस सत्र में हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों से आए विधायकों ने अपने विचार रखे और विकसित भारत के निर्माण में समाज, युवाओं तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर व्यापक चर्चा की।

विकसित भारत के लिए जागरूक समाज और उत्तरदायी नेतृत्व आवश्यक

अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत-2047 केवल आर्थिक प्रगति का लक्ष्य नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्रेरणा और जनभागीदारी का व्यापक अभियान है। इसके लिए जागरूक समाज, उत्तरदायी जनप्रतिनिधि और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास मजबूत करना और जनप्रतिनिधियों का जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देना विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की आधारशिला है।

युवा शक्ति होगी विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत

विधायकों ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने चिंता व्यक्त की कि उच्च शिक्षा की ओर जाने वाले युवाओं का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम है तथा नशे की बढ़ती प्रवृत्ति भी एक गंभीर चुनौती बन रही है। उन्होंने युवाओं को तकनीकी नवाचार, उद्यमिता और कौशल आधारित रोजगार से जोड़ने पर बल दिया।

चर्चा के दौरान कहा गया कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का विकास समान गति से होगा। कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र, पर्यावरण संरक्षण तथा आधारभूत ढांचे के विकास को समान महत्व देना होगा। वक्ताओं ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी होना चाहिए मंथन

वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल अधिकारों से नहीं बल्कि कर्तव्यों, त्याग और समर्पण से भी होता है। संविधान की मूल भावना के अनुरूप नागरिकों में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों तथा समाज के अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करना विकसित भारत की अवधारणा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सत्र में बेरोजगारी, नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी तथा जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय के अनुरूप नई तकनीकों और कौशलों को अपनाने की आवश्यकता है। शिक्षा और कौशल विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर आर्थिक और सामाजिक समानता को बढ़ावा देना होगा।

विधायकों ने पर्यावरण प्रदूषण, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी की। उन्होंने कहा कि सतत विकास के बिना विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा रहेगा। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को विकास प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए।

सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों ने विकसित भारत-2047 के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक शक्ति, जागरूक समाज, सशक्त युवा, उत्तरदायी जनप्रतिनिधि और समावेशी विकास की भावना ही भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगी।

 

इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति  हरिवंश, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष mहरविंद्र कल्याण, हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण लाल मिड्ढा, सीपीए इंडिया रीजन ज़ोन-II के विभिन्न राज्यों से पधारे अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, देश के विभिन्न विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, संसदीय अधिकारी तथा अन्य विशिष्ट अतिथिगण उपस्थिति रहे।