गांडेय / राजु मंडल :एक तरफ जहाँ देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बात कर रहा है, वहीं गांडेय प्रखंड का घोसको-चमलिटी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। गिरिडीह-जामताड़ा मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने वाली महज 3 किलोमीटर की सड़क न बनने से नाराज ग्रामीणों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर विरोध जताया।

*​नारकीय जीवन जीने को मजबूर ग्रामीण*

​ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी उन्हें एक अदद पक्की सड़क नसीब नहीं हुई है। वर्तमान में ग्रामीण पगडंडियों और कीचड़ भरी कच्ची सड़कों के सहारे आवाजाही करने को विवश हैं।
​बारिश के दिनों में यह रास्ता पूरी तरह टापू में तब्दील हो जाता है। कीचड़ के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुँच पाती, जिससे मरीजों को खटिया पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
खराब रास्ते के कारण स्कूली बच्चों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे कई बार उनकी पढ़ाई बाधित होती है।

​विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि आसपास के अन्य गांवों में सड़कों का निर्माण हो गया, लेकिन घोसको-चमलिटी के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया गया। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो आने वाले समय में वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
हमने कई बार आवेदन दिया, नेताओं और अधिकारियों के चक्कर लगाए लेकिन हर बार सिर्फ खोखला आश्वासन मिला। अब हम और इंतजार नहीं करेंगे। अगर सड़क नहीं बनी, तो हम आगामी चुनावों और सरकारी कार्यों का बहिष्कार करेंगे।
मोके पर कैलाश मंडल, मुनीलाल मंडल, राबड़ी देवी, मालती देवी, कुंती देवी, सीमा देवी, यशोदा देवी, बसंती देवी, कंचन देवी, रंजीत वर्मा, गोविन्द वर्मा, अनिल मंडल, रोहित वर्मा, दिनेश वर्मा, चेतलाल वर्मा, बजरंगी मंडल समेत दर्जनों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।