अमित राज, गुमला
किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में वहां मौजूद एंबुलेंस की सेवा को माना जाता है। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि जिस जिले में एंबुलेंस की सेवा बेहतर होगी वहां लोगों का जान आसानी से बेहतर तरीके से बचाया जा सकता है लेकिन गुमला जिला में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है गुमला जिला में सम्मान एजेंसी के माध्यम से कल 17 एम्बुलेंस जो की 108 सेवा से उपलब्ध कराई गई है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसमें से अधिकांश एंबुलेंस पूरी तरह से बेकार पड़ा हुआ है जिसके कारण लोगों की अक्सर जान जा रही है और पूरा सिस्टम तमस बिन बना हुआ है।
गुमला जिला से आए दिन या खबर सामने आती है कि समय पर एंबुलेंस की सेवा नहीं मिल पाने के कारण ग्रामीण की जान चली गई इस बात को लेकर सदर अस्पताल के पदाधिकारी हो या जिला के प्रशासनिक पदाधिकारी हो अपनी ओर से दलील देखकर अपना बचाव करते हुए नजर आते हैं लेकिन इन सब बातों की जमीनी हकीकत जानने को लेकर हमने जिला में मौजूद एंबुलेंस सेवा की स्थिति का जायजा लेने का प्रयास किया तो जो सच्चाई सामने उभर कर आई है और निश्चित रूप से आपके होश उड़ा सकती है जिला में मौजूद कराए गए एंबुलेंस के नाम पर केवल सरकार द्वारा राशि की निकासी हो रही है लेकिन एंबुलेंस का संचालन सही रूप से नहीं हो पा रहा है गुमला के सिविल सर्जन डॉक्टर शंभू नाथ चौधरी की माने तो जिला में कुल 17 एम्बुलेंस 108 की सेवा के रूप में उपलब्ध कराया गया है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसमें से केवल चार एंबुलेंस ही ऐसा है जो रांची तक मरीज को ले जाने में समर्थन है ऐसे में आप समझ सकते हैं अगर कभी 108 का एंबुलेंस आपको सेवाके लिए मिल गया तो वह आपको रांची तक सही सलामत पहुंच पाएगा कि नहीं पाएगा इस पर भी एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खरा होता है। सिविल सर्जन खुद इस बात को स्वीकार करते हैं कि जब भी 108 की सेवा के लिए टोल फ्री नंबर पर कॉल किया जाता है तो उधर से जो रिस्पांस मिलता है वह निश्चित रूप से आपको परेशान कर सकता है ऐसे में आप समझ सकते हैं कि गुमला जैसे आदिवासी बहुत इलाके की स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से भगवान भरोसे है क्योंकि यहां की अधिकांश आबादी पूरी तरह से सरकारी व्यवस्थाओं पर भी अपने स्वास्थ्य सेवा के लिए निर्भर करती है लेकिन जहां पर एंबुलेंस की सेवा ही पूरी तरह से लाचार हो चुकी हो वहां आप क्या ही उम्मीद कर सकते हैं। जिला में संचालित एंबुलेंस सेवा की संख्या पर अगर ध्यान दे तो गुमला जिला में 17 एंबुलेंस की सेवा 108 की उपलब्ध कराई गई है जिसमें से ऑन रिकॉर्ड 9 एंबुलेंस ही सड़क पर नजर आ रही है में एंबुलेंस में भी ना तो सही रूप से ऑक्सीजन की व्यवस्था रहती है और ना ही अन्य इक्विपमेंट ही सही रूप से मौजूद रहता है ऐसे में इन एंबुलेंस का उपयोग करना जीवन को पूरी तरह से भगवान भरोसे चलाने के बराबर है।
सामाजिक कार्यकर्ता मुख्तार आलम की माने तो निश्चित रूप से गुमला जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध कराया गया 108 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से अपाहिज हो चुका है जो आम लोगों की जान बचाने में पूरी तरह से असमर्थ है इस बात को लेकर उन लोगों ने भी कई बार सवाल खड़ा किया है लेकिन इस बात को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया गया जिसका परिणाम है कि आए दिन लोगों की जान एंबुलेंस के अभाव में जा रही है सही समय पर अगर एंबुलेंस मिल भी गया तो उसमें लगाया गया इक्विपमेंट की स्थिति ऐसी बनी हुई है जो आपको बचाने में काम और करने में ज्यादा सार्थक हो पाएगी ऐसे में उन लोगों के द्वारा इस मामले को लेकर सुबह के स्वास्थ्य मंत्री से भी मुलाकात की गई थी लेकिन जो आश्वासन मिला है वह जमीन पर कब हो पता है यह तो घर आने वाला समय ही बताएगा वहीं सदर असल में मौजूद एक मरीज से हमने जब बात किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें रांची रेफर किया गया है लेकिन उन्हें एंबुलेंस की सेवा मिलने के लिए कई स्थानों का चक्कर काटना पड़ रहा है ऐसे में उन्हें लग ही नहीं रहा है कि सरकार उनके लिए कोई व्यवस्था कर पाई है ऐसे में उनका जीवन भी भगवान भरोसे ही चल रहा है.
जब अस्पताल में खड़े 108 एंबुलेंस की संवाददाता के द्वारा जांच की गई तो कोई भी एंबुलेंस फुल कंडीशन में दिखाई नहीं पड़ रहा था। वहां पर एंबुलेंस की वर्तमान स्थिति के बारे में बात करने पर पता चला कि एंबुलेंस वर्तमान समय में एक डब्बा वैन के जैसा ही है जिसमें मरीज को केवल सामान की तरह एक जगह से दूसरे जगह लाया ले जाया जा सकता है। ना तो एंबुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा है नहीं कोई मेडिकल इक्विपमेंट लगा हुआ है,ना ही कोई एमरजैंसी मेडिसिन रहता है। यहां तक की उसके अंदर कोई लाइट भी नहीं है। एंबुलेंस अगर भीड़ भाड़ वाली सड़कों से गुजरती है तो उसमें सायरन भी नहीं बजता है,न ही ब्लिंकर लाइट जलता है ताकि और लोग एंबुलेंस को साइड दे सके और मरीज को जल्दी अस्पताल पहुंचाया जा सके।नाम नहीं बताने के शर्त पर इसमें काम करने वाले कुछ स्टाफ ने बताया कि वर्तमान में 108 एंबुलेंस की स्थिति काफी जर्जर है। 3 महीने से उसमें काम कर रहे स्टाफ की सैलरी नहीं मिली है। उनकी सैलरी में हमेशा कटौती कर दी जाती है।उन्हें डीजल तक भरने के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है और काफी मशक्कत के बाद डीजल मिल मिल पाता है।यहां तक कि अगर उस गाड़ी में कोई खराबी हो जाए तो एजेंसी की ओर से कोई भी ध्यान नहीं दिया जाता है स्वयं स्टाफ को उसकी रिपेयरिंग करना पड़ता है। ऐसी हालत में जहां एंबुलेंस की स्थिति में जर्जर है वहां पर मरीज का क्या हाल होता होगा यह अंदाजा लगाया जा सकता है।