पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन (सीएडी) ने जे-पॉल साउथ एशिया और हार्टेक फाउंडेशन के साथ संयुक्त रूप से आज महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी (एमआरएसपीपीए), फिल्लौर में लिंग संवेदनशीलता परियोजना, 'मेनस्ट्रीमिंग ऑफ वुमेन इन पंजाब पुलिस' के तहत तीसरे चरण के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
कार्यक्रम का दूसरा दिन विशेष रूप से ग्रुप टी2 - केवल पुरुषों के समूह - पर केंद्रित था, जिसमें 413 नामित पुलिस अधिकारी शामिल थे, जो स्टेशन हाउस अधिकारी (एसएचओ), जांच अधिकारी (आईओ), और मुंशी (एमएचसी) के रूप में सेवा निभा रहे हैं और अपने संबंधित पुलिस थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डा. बलजीत कौर ने भाग लेने वाले अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि लिंग संवेदनशीलता के साथ-साथ, अधिकारियों को कमजोर वर्ग के नागरिकों, वृद्धजनों और विशेष आवश्यकताओं वाले लोगों के प्रति सहानुभूति के साथ पेश आना चाहिए। उन्होंने कहा कि सक्षम व्यक्ति तो आसानी से मदद तक पहुंच सकते हैं, परंतु समाज में सहायता से वंचित लोगों को पुलिस से सच्ची सहानुभूति और नरमी की आवश्यकता होती है।
लिंग-अनुकूल संगठनात्मक वातावरण के महत्व को समझाते हुए, जहां महिला कर्मचारियों के साथ समानता और सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है, डा. बलजीत कौर ने घोषणा की कि सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग पंजाब पुलिस के कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन के साथ निकट समन्वय में कार्य करेगा। उन्होंने पुलिस विभाग से बच्चों के खिलाफ अपराधों से लड़ने, भिक्षावृत्ति हटाने और संगठित मानव तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए अपने विभाग के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने की अपील की।
इस अवसर पर बोलते हुए विशेष डी.जी.पी. सीएडी गुरप्रीत कौर दियो ने कहा कि पुरुष प्रधान संगठन में महिलाओं की संख्या कम होने के कारण, यह समय की आवश्यकता है कि उन्हें रूटीन की प्रशासनिक डेस्क जॉब्स के बजाय सक्रिय भूमिकाएं सौंपकर मुख्य धारा में शामिल किया जाए। उन्होंने महिला अधिकारियों को सक्रिय भूमिकाएं निभाने का आह्वान करते हुए एसएचओ और पुरुष सहकर्मियों को भी ऐसा सहायक वातावरण बनाने के निर्देश दिए जो महिलाओं को पुलिस स्टेशन टीम की प्रभावी सदस्य बनने के लिए उत्साहित करे।
प्रशिक्षण सत्रों का नेतृत्व प्रख्यात पूर्व पुलिस अधिकारियों और लीड ट्रेनर्स, महाराष्ट्र की पूर्व डीजीपी मीरा सी. बोरवणकर और पंजाब के पूर्व डीजीपी आर.सी. सिंह सहित अन्य हस्तियों द्वारा किया गया। ये सत्र लिंग आधारित रूढ़िवादी सोच को समाप्त करने, समावेशी पुलिसिंग प्रथाओं को बढ़ावा देने और जमीनी हकीकतों पर आधारित सामुदायिक साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित थे।
इस दौरान ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स मॉडल के तहत 60 मास्टर ट्रेनर्स के साथ 384 पुलिस स्टेशनों (प्रशिक्षण के लिए 288, एक नियंत्रण समूह के रूप में 96) के लगभग 2,000 पुलिस कर्मियों को कवर करते हुए व्यापक इंटरवेंशन गतिविधियाँ की गईं। अनुसंधान-आधारित प्रभाव मूल्यांकन के रूप में तैयार किया गया जे-पॉल, दृष्टिकोण और धारणाओं में आए परिवर्तनों के मूल्यांकन के लिए प्रशिक्षण-पूर्व डेटा की तुलना में प्रशिक्षणोपरांत एक अंतिम सर्वेक्षण भी करेगा।
अंतिम चौर के तीसरे और समापन दिवस अर्थात 20 अगस्त, 2026 को ग्रुप टी-1, जो केवल महिलाओं का समूह है, पर केंद्रित होगा, जिसमें राज्य के 384 पुलिस थानों की महिला हेल्पडेस्कों पर तैनात 398 पंजाब पुलिस महिला मित्र शामिल हैं।