फतह सिंह उजाला
पटौदी। अहीरवाल के छत्रप एवं केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह जो कि अपने बेदाग राजनीतिक कैरियर के लिए पॉलिटिक्स में एक मिसाल बने हुए हैं। उन्हीं के ही सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ पटौदी में पटौदी जाटोली मंडी परिषद पिछले लगभग 1 वर्ष से किसी ने किसी कारण को लेकर सुर्खियां बनी हुई है। परिषद चुनाव के बाद कमल का फूल थामने वाले पार्षद के द्वारा हाउस की मीटिंग में भाजपा सरकार के ही विभिन्न सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप डंके की चोट पर लगाए गए। ऐसे में जब दुनिया की सबसे बड़ी पॉलीटिकल पार्टी बीजेपी टॉलरेंस नीति सहित पारदर्शिता से काम करने वाली भाजपा सरकार की कथित रूप से छवि को प्रभावित होना महसूस किया गया। तो भ्रष्टाचार का भूत हाउस में नाचने की बजाय बोतल में बंद हुआ महसूस किया जा रहा है।

हाल ही में एक बेहद चौंकाने वाला मामला पटौदी जाटोली मंडी परिषद (हेली मंडी) केंपस अथवा कार्यालय को लेकर जानकारी में आया है। सूत्रों के मुताबिक सरकारी छुट्टी अथवा कार्यालय बंद रहने वाले दिन पटौदी जाटोली मंडी परिषद के हेली मंडी कैंपस में एक प्रभावशाली पार्षद के द्वारा एक कमरे में फर्नीचर रखकर कथित रूप से अपना कब्ज अथवा कार्यालय होने का दावा ठोक दिया गया। लाख टके का सवाल यह है कि संबंधित कमरे में फर्नीचर रखने की विभागीय या फिर सरकारी परमिशन यह सब किया जाने से पहले प्राप्त कर ली गई ? या फिर इसकी जरूरत ही नहीं समझी गई ? सूत्रों के मुताबिक कार्यालय बंद रहने और छुट्टी वाले दिन शहरी स्थानीय निकाय विभाग के सरकारी बिल्डिंग और कमरे में फर्नीचर पहुंच कर कथित कब्जा किया जाने की शिकायत शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री और जिला उपयुक्त को भेज कर इस पूरे प्रकरण की जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है यदि यह सब कार्य सरकार के निर्देश जिला प्रशासन या फिर परिषद के स्थानीय अधिकारी या फिर वरिष्ठ अधिकारी के लिखित आदेश और हुआ है, तो इसकी भी जानकारी पार्षदों अथवा हाउस को उपलब्ध करवाई जाए।

सूत्रों के मुताबिक पटौदी जाटोली मंडी परिषद के ही हाउस की तरफ से संबंधित निगम सहायक आयुक्त गुरुग्राम और स्थानीय कार्यकारी अधिकारी को भी अभी तक दो बार उपरोक्त संदर्भ में सही और ठोस जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए अनुरोध किया गया  । यह भी जानकारी मांगी गई है कि क्या जो भी फर्नीचर पटौदी जाटोली मंडी परिषद हेली मंडी कैंपस के कमरे में लाया गया , यह सब कार्य पटौदी जाटोली मंडी परिषद हाउस की मंजूरी के बाद किया गया ? या फिर फर्नीचर की खरीद परिषद के द्वारा टेंडर के माध्यम से की गई है ? यदि यह सब कार्य कथित मनमानी तरीके से किए गए हैं तो फिर निश्चित रूप से भाजपा सरकार की टॉलरेंस नीति और पारदर्शिता के ऊपर भी एक बड़ा सवाल बनकर जवाब का इंतजार कर रहे हैं।