महंगाई और व्यस्त जीवनशैली [Busy Lifestyle] के चलते आजकल अधिकांश माता-पिता [Parents] दोनों नौकरी [Job] कर रहे हैं ताकि अपने बच्चों [Children] का भविष्य सुरक्षित कर सकें। लेकिन इसी कोशिश में वे अपने बच्चों से खुद दूर हो रहे हैं। कई बार बच्चे [Children] नैनी [Nanny] या घरेलू मदद [Domestic Help] के पास ज्यादा समय बिताते हैं और धीरे-धीरे माता-पिता से भावनात्मक दूरी बढ़ जाती है।

आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज [Premanand Maharaj] ने इस नए ट्रेंड के प्रति आगाह किया है। उनका एक वायरल वीडियो [Viral Video] सोशल मीडिया [Social Media] पर चर्चा में है, जिसमें वे माता-पिता को समझा रहे हैं कि बच्चों को पैसा या नौकरानी की सेवा से ज्यादा उनके माता-पिता का समय और प्यार चाहिए।

बच्चों के लिए जरूरी है समय और प्यार
प्रेमानंद महाराज [Premanand Maharaj] कहते हैं, "अगर हम किसी के लिए पैसा कमा रहे हैं, लेकिन उन्हें समय नहीं दे रहे, तो उस पैसे का क्या फायदा?" उनके अनुसार बच्चों को सही मार्गदर्शन [Guidance], प्रेम [Love] और सहारा [Support] देना ज्यादा जरूरी है। नौकरानी [Nanny] की सेवा कभी माता का प्यार और मौजूदगी [Presence] नहीं दे सकती।

समाधान नौकरी छोड़ना नहीं, बल्कि समय निकालना है
महाराज [Premanand Maharaj] ने कहा कि माता-पिता की देखभाल [Parental Care] को किसी भी कीमत पर बाहर से नहीं लाया जा सकता। नौकरी छोड़ना समाधान नहीं है, लेकिन बच्चों के लिए जागरुक होकर समय निकालना अनिवार्य है। वे चेतावनी देते हैं, "अगर आज आप बच्चों को प्यार नहीं देंगे, तो कल वे भी आपको वैसा ही लौटाएंगे।"

सोशल मीडिया पर बहस
सोशल मीडिया [Social Media] पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने महाराज [Premanand Maharaj] की बात का समर्थन करते हुए कहा कि माता-पिता [Parents] और बच्चों [Children] का रिश्ता दोस्ताना [Friendly Relation] होना चाहिए। एक अन्य यूजर ने लिखा, "गुरुजी [Guruji] ने समझाया कि असली पैरेंटिंग [Parenting] क्या होती है। बच्चे बिगड़ रहे हैं तो इसका कारण हम स्वयं हैं, हम समय नहीं दे रहे।"

एक्टर सुधांशु पांडे [Sudhanshu Pandey] की राय
टीवी एक्टर सुधांशु पांडे [Sudhanshu Pandey] ने पॉडकास्ट [Podcast] में कहा कि "अगर बिल्डिंग [Building] में 100 बच्चे हैं, तो 95 बच्चों को मैं नौकरानियों [Nannies] के पास देखता हूं। बच्चे उनसे लिपटते हैं, डर लगने पर वहीं जाते हैं। माता-पिता [Parents] इस पर ध्यान नहीं देते और अपनी नौकरी के स्ट्रेस [Job Stress] में बच्चे [Children] को खो देते हैं।"

प्रेमानंद महाराज [Premanand Maharaj] की सलाह और सुधांशु पांडे [Sudhanshu Pandey] की राय यह याद दिलाती हैं कि बच्चों की परवरिश [Upbringing] में सबसे जरूरी चीज माता-पिता का समय, प्यार और मौजूदगी है, न कि पैसा या घरेलू मदद।