रफ्तार मीडिया संवाददाता/छोटू कुमार /छत्तरपुर
छत्तरपुर (पलामू):छत्तरपुर प्रखंड क्षेत्र के नौडीहा पंचायत में बुधवार को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में डायन प्रथा जैसी अमानवीय कुरीति के खिलाफ जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को डायन प्रथा प्रतिषेध अधिनियम, 2001 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।
शिविर में बताया गया कि किसी महिला को ‘डायन’ घोषित करना, उसे प्रताड़ित करना या उसके खिलाफ अफवाह फैलाना कानूनन अपराध है। अधिनियम के अनुसार ऐसा करने वालों को कारावास और जुर्माने दोनों की सजा हो सकती है। साथ ही, किसी महिला को डायन बताकर मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न करने पर सख्त दंड का प्रावधान है।
पोस्टर के माध्यम से ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि ‘डायन’ के नाम पर अंधविश्वास फैलाना, लोगों को उकसाना या झाड़-फूंक के नाम पर किसी को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है। अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में तीन माह से लेकर एक वर्ष तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एडीजे ज्योति श्री ने कहा कि अंधविश्वास और कुरीतियां समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अफवाह या अंधविश्वास पर विश्वास न करें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
डीएलएसए सचिव राकेश रंजन ने कहा कि पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है और इसके लिए हर संभव मदद की जाएगी। वहीं वक्ता संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि समाज में जागरूकता फैलाकर ही इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर बीडीओ आशीष कुमार,थाना प्रभारी सौरभ चौबे, महिला थाना प्रभारी रूपा बाखला, पंचायत प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से डायन प्रथा को खत्म करने का संकल्प लिया और इसे गांव-गांव तक जागरूकता अभियान के माध्यम से पहुंचाने की बात कही।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने, अफवाहों पर ध्यान न देने और एक सुरक्षित एवं जागरूक समाज के निर्माण में सहयोग करने की शपथ दिलाई गई।