राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन ज़ोन-II के चंडीगढ़ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर पीठासीन अधिकारियों ने चार महत्वपूर्ण संकल्पों को सर्वसम्मति से पारित किया। सम्मेलन में इस बात पर बल दिया गया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जागरूक समाज, सशक्त लोकतांत्रिक संस्थाएं तथा सक्षम जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि आउटरीच कार्यक्रमों और जन-जागरूकता पहलों के माध्यम से विधि निर्माताओं और नागरिकों के बीच संवाद एवं निकटता को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही संवैधानिक मूल्यों के प्रसार तथा तकनीक के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देकर एक ऐसे समाज के निर्माण का प्रयास किया जाएगा जो जानकार, जागरूक और सशक्त हो तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभा सके।
सम्मेलन में यह भी माना गया कि प्रभावी एवं उत्तरदायी शासन के लिए सक्षम और ज्ञानसम्पन्न विधि निर्माता आवश्यक हैं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए निरंतर व्यावसायिक प्रशिक्षण, श्रेष्ठ संसदीय एवं विधायी प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा बेहतर अनुसंधान सहायता के माध्यम से जनप्रतिनिधियों की क्षमता को और सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की गई।
प्रतिनिधियों ने विधायी निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता के विश्वास को बढ़ाने तथा नीति निर्माण एवं उसके प्रभावी क्रियान्वयन में नागरिकों की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। सम्मेलन में यह मत व्यक्त किया गया कि लोकतंत्र की सफलता जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद तथा सहभागिता पर निर्भर करती है।
सम्मेलन में सार्वजनिक सेवा प्रदायगी को अधिक पारदर्शी, कार्यकुशल और सुलभ बनाने के लिए डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया के व्यापक उपयोग को प्रोत्साहित करने का भी संकल्प लिया गया। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि तकनीक आधारित सुशासन से नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।