नई दिल्ली— भारत सरकार ने घरेलू उद्योगों को सस्ते और अनुचित आयात से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए चीन और ताइवान से आयात होने वाली प्लास्टिक प्रोसेसिंग मशीनों पर पांच वर्षों के लिए एंटी डंपिंग शुल्क लगा दिया है। यह निर्णय केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की सिफारिश पर लिया गया है।

गुरुवार को जारी अधिसूचना में CBIC ने बताया कि यह शुल्क घरेलू उद्योगों को अनुचित व्यापार प्रथाओं से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लगाया गया है। इसका मकसद है भारत के स्थानीय निर्माताओं को सस्ती विदेशी मशीनों से होने वाले नुकसान से बचाना और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को प्रोत्साहन देना।

वहीं CBIC की एक अन्य अधिसूचना के अनुसार ऑटोमोबाइल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले मिका पर्ल पिगमेंट पर एंटी डंपिंग शुल्क पिगमेंट के ग्रेड पर निर्भर करेगा। सभी प्रकार के मटेरियल पर शुल्क लागू नहीं होगा।

चीन ने भारत के लिए रोकी महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति
इस बीच चीन ने भारत को निर्यात किए जाने वाले कुछ विशेष उर्वरक और रेयर अर्थ मिनरल्स की शिपमेंट को रोक दिया है। भले ही आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा न की गई हो लेकिन शिपमेंट जांच प्रक्रिया में देरी और निर्यात नियमों में बदलाव के कारण भारत के व्यापारियों को बार-बार आवेदन रद्द होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

राजनाथ सिंह और चीनी रक्षा मंत्री की बैठक
भारत और चीन के बीच व्यापार और सीमा संबंधों में तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से द्विपक्षीय वार्ता की। इस बातचीत में सीमा विवाद सीमा पार आतंकवाद और दोनों देशों के बीच बेहतर राजनयिक संबंधों की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

राजनाथ सिंह ने बैठक के दौरान चार-आयामी योजना पेश की जिसका उद्देश्य सीमा पर तनाव को कम करना और कूटनीतिक रिश्तों को मज़बूत बनाना था।

कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू
बैठक में यह भी बताया गया कि लगभग छह वर्षों के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। यह यात्रा धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भारत-चीन संबंधों में एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है।