वॉशिंगटन – पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एक संघीय अदालत के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके लगाए गए अधिकांश व्यापक टैरिफ को अवैध करार दिया गया था। ट्रंप प्रशासन ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि ये टैरिफ न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हैं, बल्कि यूक्रेन में शांति स्थापना के प्रयासों से भी गहराई से जुड़े हैं।
अदालती दस्तावेज़ों में ट्रंप प्रशासन ने कहा,
"राष्ट्रपति ने हाल ही में यूक्रेन में रूस के युद्ध के संबंध में पहले से मौजूद राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद के जवाब में भारत के खिलाफ IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत टैरिफ लगाने को अधिकृत किया है। यह उस युद्धग्रस्त देश में शांति स्थापना के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण पहलू है।"
अदालत के पिछले फैसले में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ को कानून की सीमा से बाहर बताया गया था, जिससे व्यापारिक क्षेत्र में चिंता और अनिश्चितता पैदा हो गई थी। लेकिन प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति को विदेशी खतरों के जवाब में आपातकालीन आर्थिक उपाय करने का पूरा अधिकार है — खासतौर पर जब बात रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे वैश्विक संकट की हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य की अमेरिकी व्यापार नीति और राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा तय कर सकता है।
पृष्ठभूमि:
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान कई देशों — जिनमें चीन, भारत और यूरोपीय संघ शामिल हैं — के खिलाफ टैरिफ लगाए गए थे, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिकी उद्योगों की रक्षा के नाम पर लागू किया गया था। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इन टैरिफों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचाया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर असर डाला।
अब यह देखना बाकी है कि सुप्रीम कोर्ट इस चुनौती पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह प्रशासनिक शक्तियों के दायरे को फिर से परिभाषित करेगा।