कप्तानगंज बस्ती: बस्ती जिले के विकास खण्ड कप्तानगंज के दुबौली दूबे में गाँव के बड़े बुजुर्गों सहित युवाओं द्वारा होली का पारंपरिक गीत, फगुआ, उलारा, चैता आदि गया गया। होली के अवसर पर आयोजित इस समारोह में गीतों के साथ, गुलाल, अबीर, प्राकृतिक रंग व फूलों की होली खेली गई।
गांव देहात से विलुप्त हो रहे होली की पारंपरिक गीतों को जीवित रखने की एक कोशिश श्री दुर्गा मंदिर दुबौली दूबे की भजन मंडली के श्रद्धालु जन कर रहे हैं उनके प्रयास से आज युवाओं में भी फगुआ की रुचि दिख रही है। होली (फगुआ) की शुरुआत सरस्वती वंदना, श्री राम जी के भजन से हुआ। श्री कृष्ण जी से जुड़े गीत लइका हो गोपाल, लइका हो गोपाल कूद पड़े यमुना में.... इसके बाद भगवान शिव और पार्वती से जुड़े गीत होली खेल रहे शिवशंकर गौरा पार्वती संग......वहीं भगवान राम और सीता से जुड़े होली गीत, सिया निकले अवधवा की ओर होरिया खेले रामलला....... व राधा-कृष्ण से जुड़ी होली गीत, राधा घोरअ ना अबीर बगिया में अइले कन्हैया..... और राधा संग होली खेल रहे घनश्याम....... आदि पारंपरिक होली गीत को बुजुर्गों ने बड़े दमखम और अपनी बुलंद आवाज में गाया।
गांव के विभिन्न मनमोहक होली गीत, मोहन धरे रुप जनाना....., अली वृषभान लली....., तोहि सुमिरीला पवन कुमार अन्जनी....वही झुलनी का रसवा ले भागा। मेरा सैया अभागा न जाना........, होली खेले अवध में रघबीरा......
विभिन्न होली संबंधित गीतों को प्रस्तुत कर लोगों को मंत्र मुक्त कर दिया, होली गीत गा रहे लोगों ने बताया कि जो मिठास पहले के गीतों में है, वह आज सुनने को नहीं मिल रहे हैं। ढोलक, झाल, हारमोनियम और झांझ के साथ होली गीत गा रहे बड़े-बुजुर्गों का साथ युवा भी देते दिखें।
फगुआ गायक टीम में शिवनाथ चौबे, अखिलेश दूबे, सहदेव दूबे दुबे, बुद्धि सागर दुबे, देवेंद्र त्रिपाठी, बाबूराम चौधरी जगदेव शर्मा, दिग्विजय नाथ चौवे, मनोज दुबे, राजकुमार दुबे, ओम प्रकाश दूबे, महेंद्र, पंकज त्रिपाठी, अनुराग शुक्ला,
आदि मौजूद रहे।