बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर हिंसा एक और हिंदू व्यापारी की पीट-पीटकर हत्या
बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों खासकर हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा और अत्याचारों का सिलसिला जारी है। स्थानीय मीडिया और सोशल रिपोर्टों के मुताबिक कल (शनिवार) वहां एक हिंदू व्यापारी को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला जिससे क्षेत्र में चिंता और विवाद बढ़ गया है। इस घटना ने मानवाधिकार और अल्पसंख्यक सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों को और ताजा कर दिया है।
पिटाई में मारे गए व्यापारी का नाम लिटन चंद्र घोष बताया जा रहा है जो कलीगंज इलाके में ‘बैशाखी स्वीटमीट और होटल’ नामक व्यवसाय चलाते थे। स्थानीय पुलिस ने बताया कि ग्राहकों के साथ एक मामूली विवाद के बाद मामला उग्र रूप ले लिया और भीड़ ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया। गंभीर हालत में ले जाते समय उनका निधन हो गया। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ कई और हिंसात्मक हमले भी रिपोर्ट किए गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कम से कम कई हिंदुओं की मौत दर्ज की गई है जिनमें से कुछ को पीट-पीटकर मारा गया तथा कुछ को आग के हवाले किया गया था। स्थानीय मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन घटनाओं से अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
समाचार एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार हाल ही में शरियतपुर जिले में एक 50 वर्षीय हिंदू व्यवसायी खोकोन चंद्र दास को भी भीड़ ने हमला करके आग लगा दी थी जिनकी बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जांच में कई मामलों को लूट धार्मिक नफरत और सामाजिक तनाव से जुड़े संभावित कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
इन बढ़ती हिंसाओं के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र सहित कुछ वैश्विक संस्थाओं ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे हमलों की रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध कदम उठाने की मांग की है। कई आलोचकों का यह भी मानना है कि स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेने की ज़रूरत है।
इस बीच स्थानीय हिंदू समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ता न्याय की मांग कर रहे हैं तथा मृतकों के परिवारों को समर्थन देने और आगे की सुरक्षा के उपायों पर जोर दे रहे हैं। इस घटना ने बांग्लादेश में धार्मिक समता और कानून व्यवस्था को लेकर फिर से गहरी बहस छेड़ दी है।
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