राजु मंडल/ रफ्तार मीडिया /सवाददाता गांडेय

​गांडेय (गिरिडीह):रोजी-रोटी और मजबूरी के दलदल ने झारखंड की एक और बेटी की जिंदगी छीन ली। गांडेय थाना क्षेत्र के गांडेय बाजार स्थित हरिजन टोला निवासी बसंत उर्फ गणु तुरी की 28 वर्षीय पुत्री लक्ष्मी देवी का गुजरात के सूरत में मजदूरी के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। मृतका अपने पीछे 10 वर्षीय पुत्र को छोड़ गई है, जिसका रो-रोकर बुरा हाल है।

*​पति की बेरुखी ने धकेला पलायन के दलदल में*

मृतका के पिता बसंत तुरी ने बताया कि करीब 11 वर्ष पूर्व हिंदू रीति-रिवाज से लक्ष्मी का विवाह हुआ था। दांपत्य जीवन के कुछ वर्षों बाद ही पति ने उसे बेसहारा छोड़ दूसरी महिला से शादी रचा ली। पति द्वारा त्यागे जाने के बाद लाचार लक्ष्मी ने हार नहीं मानी और अपने मासूम बेटे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी खुद उठाई। स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण वह करीब तीन वर्ष पूर्व 10 वर्षीय बेटे को साथ लेकर सूरत (गुजरात) चली गई, जहां मजदूरी कर जीवन-यापन कर रही थी।

*​गांव पहुंचते ही मची चीख-पुकार*

सूरत में अचानक तबीयत बिगड़ने या आकस्मिक कारणों से लक्ष्मी की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता और अन्य परिजन सूरत पहुंचे और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद सोमवार को शव लेकर पैतृक गांव गांडेय पहुंचे। शव के गांव पहुंचते ही परिजनों की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। स्थानीय श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

*​पलायन की मार झेल रहीं महिलाएं*

यह हृदयविदारक घटना राज्य में गंभीर रूप ले चुकी पलायन की समस्या को फिर से उजागर करती है। पेट की आग और लाचारी के चलते अब केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बेसहारा महिलाएं भी दूसरे राज्यों में पलायन करने को विवश हैं। मां के गुजर जाने के बाद 10 वर्षीय मासूम अब पूरी तरह अनाथ हो चुका है, जिसके भविष्य को लेकर ग्रामीण भी चिंतित हैं।