सौरभ राय/रफ्तार मीडिया
रांची: झारखंड की राजनीति में इन दिनों जेपीएससी और जेएसएससी के मुद्दे पर राजनीति गरमा चुकी है। इस बीच आजसू पार्टी ने राज्य सरकार से तत्काल संवाद स्थापित करने की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि राज्य सरकार को आंदोलनरत छात्रों से टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय बातचीत के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। आजसू ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सीबीआई जांच की मांग की है।आजसू पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत एवं केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने जेपीएससी और जेएसएससी प्रकरण, आंदोलनरत छात्रों की स्थिति और राज्य की भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की नसीहत दी।
15 अगस्त से पहले बलपूर्वक कार्रवाई से बचने की अपील
मौके पर डॉ. लंबोदर महतो ने राज्य सरकार से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि 15 अगस्त से पहले छात्रों को बलपूर्वक हटाकर आंदोलन समाप्त कराने जैसी किसी भी कार्रवाई से बचा जाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना होगा कि आंदोलन के पीछे युवाओं की चिंताएं और उनके भविष्य से जुड़े सवाल हैं। इन सवालों का समाधान पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और विश्वास बहाली से ही संभव है।
भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल - देवशरण भगत
वहीं,आजसू पार्टी के केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी प्रकरण ने राज्य की पूरी परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि हजारों युवाओं के मन में भर्ती प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हुआ है और केवल प्रशासनिक कार्रवाई अथवा आंतरिक जांच से इन संदेहों का समाधान नहीं होगा।उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए, ताकि वास्तविकता सामने आ सके। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पुलिस बल नहीं, वार्ता से निकले समाधान -संजय मेहता
केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा कि सरकार को आंदोलनरत छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 19 दिनों से छात्र खुले आसमान के नीचे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।उन्होंने कहा कि छात्रों को आंदोलन स्थल से हटाने या आंदोलन को दबाने के प्रयास के बजाय सरकार के प्रतिनिधियों को छात्रों के बीच जाकर उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक आंदोलन के खिलाफ जबरदस्ती या दमनात्मक कार्रवाई स्वीकार्य नहीं हो सकती।
आजसू ने उठाए छह प्रमुख मुद्दे
आजसू पार्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राज्य सरकार के समक्ष छह प्रमुख मांगें रखीं। पार्टी ने कहा कि सरकार को छात्रों से तत्काल और सार्थक संवाद शुरू करना चाहिए। आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक अथवा बलपूर्वक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।पार्टी ने 15 अगस्त से पहले आंदोलन समाप्त कराने के लिए किसी भी तरह की जबरदस्ती से बचने,जेपीएससी और जेएसएससी प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सीबीआई जांच कराने और जांच के आधार पर दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। इसके अलावा परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुधार लागू करने की मांग भी की गई।