सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर-1 अंतर्गत बनडीह में वनभूमि पर कथित अतिक्रमण, हाईमास्ट लाइट लगाने और प्लॉटिंग का मामला एक बार फिर गरमाता नजर आ रहा है।ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की पूर्व कार्रवाई के बाद कुछ समय तक गतिविधियां थमी रहीं, लेकिन अब कथित तौर पर वनभूमि पर दोबारा प्लॉटिंग की गतिविधियां शुरू हो गई हैं।ग्रामीणों के अनुसार, बनडीह क्षेत्र की कथित वनभूमि पर हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए पिलर खड़े किए गए थे। मामला सामने आने और इसकी शिकायत के बाद वन विभाग की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई थी। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के बावजूद हाईमास्ट लाइट के पिलर अब भी मौके पर मौजूद हैं और कथित अतिक्रमण के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के बाद मामला कुछ समय के लिए शांत रहा, लेकिन अब कथित तौर पर भूमाफिया फिर सक्रिय हो गए हैं। मौके पर हाईमास्ट लाइट से जुड़े अन्य उपकरण गिराए जाने की भी बात सामने आ रही है। इसके अलावा वनभूमि के आसपास कथित रूप से प्लॉटिंग का काम दोबारा शुरू किए जाने की सूचना ग्रामीणों ने दी है।
कॉलोनी बसाने की आशंका, ग्रामीणों ने जताई चिंता
स्थानीय ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो बनडीह की वनभूमि पर भी धीरे-धीरे कब्जा कर प्लॉटिंग के जरिए कॉलोनी बसाने की कोशिश की जा सकती है। ग्रामीणों ने गम्हरिया क्षेत्र में शांति नगर और बांता नगर के विकसित होने का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह धीरे-धीरे सरकारी जमीन पर कब्जे के बाद जमीन की खरीद-बिक्री का सिलसिला शुरू होने की आशंका है।ग्रामीणों के मुताबिक, वनभूमि पर इस तरह की गतिविधियों से सरकारी जमीन प्रभावित होने के साथ-साथ क्षेत्र के पर्यावरण और हरित क्षेत्र को भी नुकसान पहुंच सकता है।
एक कथित भूमाफिया पर भी लगाए आरोप
इस मामले में ग्रामीणों ने एक रसूखदार व्यक्ति पर भी वनभूमि पर कथित कब्जे और उसे प्लॉट के रूप में बेचने की कोशिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उक्त व्यक्ति कुछ लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर वनभूमि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों, विशेषकर डीएफओ को कई बार लिखित शिकायत देने के साथ व्यक्तिगत रूप से भी मामले की जानकारी दी है। इसके बावजूद स्थायी कार्रवाई नहीं होने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं।
डीसी से रिकॉर्ड की जांच और तत्काल कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने अब सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर बनडीह की जमीन की जांच कराई जाए। यदि जमीन वनभूमि पाई जाती है तो वहां किए गए सभी कथित अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए।इसके साथ ही हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए खड़े किए गए पिलरों और मौके पर रखे गए अन्य उपकरणों की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने कथित प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने तथा जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की भी मांग उठाई है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में पहले से ही हरित और वन क्षेत्र सीमित है। ऐसे में बची हुई वनभूमि को कथित अतिक्रमण के जरिए कॉलोनी में तब्दील करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा।फिलहाल, इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बनडीह की संबंधित जमीन सरकारी रिकॉर्ड में वनभूमि के रूप में दर्ज है या नहीं। साथ ही, यदि जमीन वनभूमि है तो वहां हुए कथित अतिक्रमण, हाईमास्ट लाइट के पिलरों और प्लॉटिंग की गतिविधियों पर वन विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। वन विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।