रफ्तार मीडिया/सवांददाता दुमका।
दुमका जिले का सीमावर्ती क्षेत्र मसलिया इन दिनों मवेशी तस्करों के लिए एक सुरक्षित गलियारा बनता जा रहा है। दुमका से सटे देवघर जिला के पालोजोरी हटिया से बड़े पैमाने पर मवेशियों की खरीदारी कर उन्हें अवैध रास्तों के जरिए पश्चिम बंगाल और वहां से बांग्लादेश तक भेजा जा रहा है। इस अवैध धंधे से स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मवेशी व्यापारी प्रत्येक सोमवार को पालोजोरी हटिया से सैकड़ों की संख्या में पशुओं को खरीदते हैं। इसके बाद इन मवेशियों को मसलिया के धवाडंगाल के रास्ते पिपरा और घने जंगलों के मार्ग से बलियाजोड़ होते हुए पश्चिम बंगाल के राजनगर हटिया तक पैदल ही खदेड़ कर ले जाया जाता है। सूत्रों और ग्रामीणों का दावा है कि राजनगर हटिया पहुंचने के बाद इन मवेशियों की बड़ी खेप को देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित बड़े बूचड़खानों और सीमा पार बांग्लादेश तस्करी के लिए भेज दिया जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पश्चिम बंगाल चुनाव के समय प्रशासनिक सख्ती के कारण तस्कर कुछ समय के लिए शांत हो गए थे, लेकिन अब यह काला कारोबार दोबारा पूरी सक्रियता के साथ शुरू हो गया है। हर सोमवार को जंगल के रास्ते सैकड़ों मवेशियों की आवाजाही देखी जा सकती है। इधर, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से गुहार लगाई है कि जंगल के इन रास्तों पर गश्ती बढ़ाई जाए। साथ ही, मवेशियों की अवैध तस्करी में शामिल पूरे रैकेट की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, इस अवैध कारोबार पर पूर्ण विराम लग सके।