कोलकाता, 28 अक्टूबर 2025
चुनाव आयोग द्वारा पूरे देश में विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अचानक एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर एक ही दिन में 500 से अधिक अधिकारियों का तबादला कर दिया गया।
हालांकि ये आदेश 24 अक्टूबर को जारी किए गए थे, लेकिन विभागीय वेबसाइट पर इन्हें चुनाव आयोग की घोषणा से ठीक पहले और बाद में चरणबद्ध रूप से अपलोड किया गया।
एक ही दिन में बड़े पैमाने पर तबादले
सुबह के समय 61 आईएएस और 145 डब्ल्यूबीसीएस (एक्जीक्यूटिव) अधिकारियों के तबादले की सूची जारी की गई,
जबकि चुनाव आयोग की प्रेस ब्रीफिंग के तुरंत बाद 6 आईएएस और 315 डब्ल्यूबीसीएस अधिकारियों की नई नियुक्तियों की सूची भी वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई।
राज्य सरकार के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, क्योंकि कई अफसर अब मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल होंगे।
SIR प्रक्रिया: क्या है और कब चलेगी
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, यह अधिकारी SIR प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाएंगे।
चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार —
SIR की अवधि: 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025
मसौदा मतदाता सूची जारी होगी: 9 दिसंबर 2025
अंतिम सूची प्रकाशित होगी: 7 फरवरी 2026
एक बार कार्यक्रम तय हो जाने के बाद राज्य सरकार को किसी भी अधिकारी के तबादले के लिए चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी।
चुनाव आयोग का बयान: “SIR बाधित नहीं होगी”
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा।
उन्होंने कहा,
“राज्य सरकारों का यह संवैधानिक दायित्व है कि वे SIR प्रक्रिया के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।”
कुमार ने बताया कि आयोग नवंबर से फरवरी के बीच 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दूसरे चरण की शुरुआत करेगा, जिनमें —
अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
क्या बंगाल में SIR को लेकर हिंसा की आशंका?
जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान “खूनखराबे” या राजनीतिक हिंसा की आशंका है,
तो मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट जवाब दिया,
“इसमें कोई बाधा नहीं है। निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपने कर्तव्यों का पालन कर रहा है, और राज्य सरकारें भी अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिए बाध्य हैं।”
राजनीतिक मायने
चुनाव आयोग की घोषणा से ठीक पहले और बाद में अफसरों के तबादले को लेकर विपक्ष ने ममता सरकार पर सवाल उठाए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य सरकार SIR प्रक्रिया के दौरान “प्रशासनिक नियंत्रण” बनाए रखने की कोशिश कर रही है,
वहीं टीएमसी सरकार का कहना है कि यह तबादला “सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया” है और इसका चुनाव आयोग के निर्णय से कोई संबंध नहीं।
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