अमरीका व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह एक नए नियंत्रित ढांचे के तहत वेनेजुएला के कच्चे तेल को भारत समेत अन्य देशों को बेचने के लिए तैयार है। यह संकेत अमेरिकी प्रशासन की बदलती विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का वैश्विक मार्केट में अधिक सक्रिय भागीदार बनाना चाहता है।
व्हाइट हाउस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि नया “यूएस-नियंत्रित फ्रेमवर्क” भारत जैसे देशों को वेनेजुएला का तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है, ताकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकें, जबकि अमेरिका पूरी बिक्री को नियंत्रित और निगरानी में रखेगा। इससे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पहले ठप पड़े व्यापार को फिर से गति मिल सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका की भूमिका को मजबूत करने के लिए देख रहा है। वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल, जो लंबे समय तक भारत के रिफाइनरियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है, अब संभावित रूप से भारत को फिर से उपलब्ध हो सकता है यदि अमेरिकी नियमों के तहत लाइसेंस और मंज़ूरी मिलती है।
हालांकि अभी अंतिम रूप से कोई सौदा तय नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका वैश्विक तेल बाजार में वेनेजुएला के उत्पादन को “निगरानी में बेचने” की योजना बना रहा है, जिसमें अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि तेल बिक्री से होने वाली आय “वेनेजुएला के लोगों के हित में” इस्तेमाल हो।
पिछले वर्षों में भारत वेनेजुएला से तेल आयात का एक बड़ा ग्राहक रहा है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों ने 2025 में इस व्यापार को काफी कम कर दिया था। अब इसके फिर से शुरू होने की संभावना से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विविध स्रोतों से तेल मिलना आसान हो सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम केवल तेल बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि अमेरिका की वैश्विक राजनीतिक और ऊर्जा रणनीति में बदलाव का भी संकेत देता है, जिससे वह आपूर्ति श्रृंखलाओं को नियंत्रित रखे और ऊर्जा डिपेंडेंसी के मुद्दों को संतुलित करे।