नई दिल्ली: भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के अगले 20 वर्षों के लिए एक व्यापक और महत्वाकांक्षी एजेंडा सामने रखा। उन्होंने कहा कि BRICS अपनी स्थापना के दो दशक पूरे कर चुका है और अब उसे ‘Coming of Age’ यानी परिपक्वता के साथ नई जिम्मेदारियों के दौर में प्रवेश करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने BRICS को केवल देशों के समूह तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने वाली ताकत बनाने पर जोर दिया।
‘Power Pyramid’ से ‘Partnership Platform’ की ओर बढ़ने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को ‘Power Pyramid’ से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया के महत्वपूर्ण फैसलों और सत्ता का बड़ा हिस्सा कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित है। दूसरी ओर, Global South के कई देश वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा असर झेलते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने ‘Pyramid of Privilege’ को ‘Platform of Partnership’ में बदलने की जरूरत बताई। मोदी के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें हर देश की आवाज सुनी जाए, प्रत्येक सदस्य की उचित भागीदारी हो और मानवता का विकास सबसे ऊपर रहे।
इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री ने BRICS देशों से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें अगले BRICS Summit तक एक Reform Roadmap का रूप देने का सुझाव दिया।
UN Security Council में सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि UN Security Council Reform को अब और टाला नहीं जा सकता। सुधार की प्रक्रिया को स्पष्ट समयसीमा और ठोस परिणामों से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भी बदलाव की वकालत की। PM मोदी ने कहा कि इन संस्थाओं में Voting Power, Leadership और Policy Priorities को मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देशों को निर्णय प्रक्रिया में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
BRICS के फैसलों को लागू करने के लिए नया मैकेनिज्म
प्रधानमंत्री ने BRICS के भीतर लिए गए फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए ‘BRICS Continuity and Implementation Mechanism’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद संगठन की योजनाओं और फैसलों की गति बनाए रखना है।
इसके लिए Troika व्यवस्था के जरिए फैसलों की निगरानी और एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव दिया गया, ताकि पहले लिए गए निर्णयों और पहलों का लगातार फॉलोअप किया जा सके।
समुद्री यात्रियों के लिए Emergency Support Network का प्रस्ताव
PM मोदी ने समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की मदद के लिए ‘Seafarers’ Emergency Support Network’ बनाने का सुझाव भी दिया। इसके जरिए संकट में फंसे समुद्री यात्रियों को मेडिकल सहायता, उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने और आवश्यकता पड़ने पर Evacuation जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि BRICS का अगला दशक केवल विस्तार और बैठकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। संगठन को अपने फैसलों को जमीन पर लागू करने के साथ-साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में भी प्रभावी भूमिका निभानी होगी।
BRICS के अगले 20 साल का एजेंडा: PM मोदी ने दिया ‘पावर के पिरामिड’ को ‘पार्टनरशिप प्लेटफॉर्म’ में बदलने का मंत्र
नई दिल्ली: भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन के अगले 20 वर्षों के लिए एक व्यापक और महत्वाकांक्षी एजेंडा सामने रखा। उन्होंने कहा कि BRICS अपनी स्थापना के दो दशक पूरे कर चुका है और अब उसे ‘Coming of Age’ यानी परिपक्वता के साथ नई जिम्मेदारियों के दौर में प्रवेश करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने BRICS को केवल देशों के समूह तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने वाली ताकत बनाने पर जोर दिया।
‘Power Pyramid’ से ‘Partnership Platform’ की ओर बढ़ने का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को ‘Power Pyramid’ से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया के महत्वपूर्ण फैसलों और सत्ता का बड़ा हिस्सा कुछ देशों या संस्थाओं तक सीमित है। दूसरी ओर, Global South के कई देश वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा असर झेलते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने ‘Pyramid of Privilege’ को ‘Platform of Partnership’ में बदलने की जरूरत बताई। मोदी के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें हर देश की आवाज सुनी जाए, प्रत्येक सदस्य की उचित भागीदारी हो और मानवता का विकास सबसे ऊपर रहे।
इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री ने BRICS देशों से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें अगले BRICS Summit तक एक Reform Roadmap का रूप देने का सुझाव दिया।
UN Security Council में सुधार पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि UN Security Council Reform को अब और टाला नहीं जा सकता। सुधार की प्रक्रिया को स्पष्ट समयसीमा और ठोस परिणामों से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भी बदलाव की वकालत की। PM मोदी ने कहा कि इन संस्थाओं में Voting Power, Leadership और Policy Priorities को मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देशों को निर्णय प्रक्रिया में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
BRICS के फैसलों को लागू करने के लिए नया मैकेनिज्म
प्रधानमंत्री ने BRICS के भीतर लिए गए फैसलों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए ‘BRICS Continuity and Implementation Mechanism’ बनाने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य हर साल अध्यक्षता बदलने के बावजूद संगठन की योजनाओं और फैसलों की गति बनाए रखना है।
इसके लिए Troika व्यवस्था के जरिए फैसलों की निगरानी और एक सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का सुझाव दिया गया, ताकि पहले लिए गए निर्णयों और पहलों का लगातार फॉलोअप किया जा सके।
समुद्री यात्रियों के लिए Emergency Support Network का प्रस्ताव
PM मोदी ने समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की मदद के लिए ‘Seafarers’ Emergency Support Network’ बनाने का सुझाव भी दिया। इसके जरिए संकट में फंसे समुद्री यात्रियों को मेडिकल सहायता, उनके परिवारों तक सूचना पहुंचाने और आवश्यकता पड़ने पर Evacuation जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि BRICS का अगला दशक केवल विस्तार और बैठकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। संगठन को अपने फैसलों को जमीन पर लागू करने के साथ-साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में भी प्रभावी भूमिका निभानी होगी।