दिल्ली पुलिस की IFSO (Intelligence Fusion & Strategic Operations) यूनिट ने आज एक बड़े साइबर क्राइम रैकेट को गिरफ्तार करते हुए एक चीनी नागरिक समेत सात मास्टरमाइंड्स को पकड़ने का दावा किया है। यह कार्रवाई राजधानी में साइबर धोखाधड़ी, डिजिटल ठगी और फर्जी तकनीकी अभियानों को रोकने के लिए की गई है, जिसमें विदेशी नेटवर्क से जुड़े अपराधियों को भी निशाना बनाया गया है।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के सदस्य डिजिटल “डिजिटल अरेस्ट” तकनीक, फर्जी कॉलिंग और व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिये वरिष्ठ नागरिकों और आम लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बना रहे थे। आरोप है कि आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर खुद को पुलिस या सरकारी एजेंसी का अधिकारी बता कर लोगों को दबाव में रखा और उनसे रकम वसूलने का प्रयास किया।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए सातों लोगों में एक चीनी नागरिक भी शामिल है, जिससे पता चलता है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था। पुलिस का कहना है कि विदेशी मूल के इस आरोपी का नेटवर्क भारत में कई ठगों से जुड़ा हुआ था, जिन्होंने मिलकर साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी को अंजाम दिया। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहरी जांच कर रही है और अन्य सहयोगियों तक पहुँचने के प्रयास में है।
आईएफएसओ यूनिट ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से साइबर उपकरण, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि वे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर लोगों को ठगने की योजना बना रहे थे। पुलिस ने इन उपकरणों को फ़ॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि नेटवर्क के अन्य स्तरों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी अनजान कॉल, मैसेज या व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर भरोसा न करें, खासकर जब कोई आपको सरकारी अधिकारी बता कर डराने‑धमकाने की कोशिश करे। ऐसे मामलों में तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना देने की सलाह दी गई है।
यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम के खिलाफ जारी अभियान का हिस्सा है, जिसमें पिछले कुछ समय में कई बड़े ठगी नेटवर्क और साइबर गिरोहों को पकड़ा गया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अपराध तेजी से विकसित हो रहे हैं और इस प्रकार के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के खिलाफ सतर्कता और समन्वित कार्रवाई अनिवार्य है