रफ्तार मीडिया/ कासगंज: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और कुंभकरणीय नींद का एक और खौफनाक खामियाजा सामने आया है। गांव बीनपुर कलां में अमापुर-सहावर रोड पर संचालित एक अवैध क्लिनिक में इलाज के दौरान एक बुजुर्ग महिला की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बुजुर्ग महिला की मौत की खबर फैलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम आनन-फानन में मौके पर पहुंची। हमेशा की तरह, इस बार भी विभाग ने अपनी साख बचाने के लिए आनन-फानन में क्लिनिक को सील करने की 'खानापूर्ति' कर दी। जब मीडिया कर्मियों ने मौके पर मौजूद नोडल अधिकारी उत्कर्ष यादव से इस लापरवाही पर सीधे सवाल किए, तो वह कैमरे के सामने अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आए। उनके पास इस बात का कोई संतुष्ट जवाब नहीं था कि जब क्लिनिक अवैध था, तो उसे पहले ही बंद क्यों नहीं कराया गया? उन्होंने सिर्फ इतना कहकर पल्ला झाड़ लिया: "इसे अभी सील किया है, आगे की कार्रवाई करेंगे।"
इधर स्थानीय ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत और लापरवाही का एक बड़ा खुलासा किया है। ग्रामीणों के मुताबिक चार दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग की टीम और खुद नोडल अधिकारी उत्कर्ष यादव इसी अवैध क्लिनिक पर औचक निरीक्षण के लिए आए थे। क्लिनिक अवैध होने के बावजूद, अफसरों ने न तो इसे सील किया और न ही कोई सख्त कानूनी कार्रवाई की। टीम इस मौत की दुकान को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ कर चली गई। विभाग की इसी ढिलाई का नतीजा रहा कि ठीक चार दिन बाद एक मासूम बुजुर्ग महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बड़ा सवाल: मौतों के इस खेल का जिम्मेदार कौन?
"कासगंज जिले में अवैध क्लिनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों का जाल मकड़जाल की तरह फैला हुआ है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग गहरी नींद में सोया है। सवाल यह है कि आखिर इस महिला की मौत का असली जिम्मेदार कौन है? वह झोलाछाप डॉक्टर, या वह विभाग जिसने चार दिन पहले सब कुछ देखकर भी आंखें मूंद लीं?"
अगर जिले में इसी तरह धड़ल्ले से अवैध रूप से संचालित क्लिनिक और अस्पताल चलते रहे, और विभाग मौतों के बाद ही जागने का नाटक करता रहा, तो जनता का सिस्टम पर से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में दोषी स्वास्थ्य अधिकारियों पर कोई गाज गिरती है या फिर इस फाइल को भी 'दबा' दिया जाएगा।