मोतिहारी/पताही। पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड स्थित पदुमकेर मे ऐतिहासिक घोड़दौर पोखरा का पर्यटन स्थल के रूप में कराया जा रहा विकास इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों रुपये की लागत से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना की धीमी प्रगति को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग नौ माह से लेकर एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है, जिससे यह परियोजना धरातल पर दम तोड़ती हुई दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा से पूरे क्षेत्र में उत्साह था। लोगों को उम्मीद थी कि इससे न केवल गांव की पहचान बढ़ेगी बल्कि रोजगार और पर्यटन की नई संभावनाएं भी विकसित होंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर लोगों का धैर्य अब टूटने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस परियोजना का कई बार बड़े अधिकारियों ने निरीक्षण किया। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने भी इस दिशा में पहल की। ग्रामीणों का दावा है कि चिरैया विधानसभा के विधायक लालबाबू प्रसाद गुप्ता ने भी इस मामले को गंभीरता से उठाया, लेकिन इसके बावजूद कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्तर पर प्रयास तो दिखाई देते हैं, लेकिन धरातल पर उनका असर नजर नहीं आ रहा।
स्थानीय समाजसेवी संत सुरेश सिंह ने बताया कि घोड़दौर पोखरा का इतिहास काफी प्राचीन है। उनका कहना है कि यह पोखरा उस दौर की धरोहर है जब राजाओं का शासन हुआ करता था। उन्होंने दावा किया कि आज भी इस पोखरा का अधिकांश भाग वर्षभर पानी से भरा रहता है, जो इसकी ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक महत्ता को दर्शाता है। उनका कहना है कि यदि इसका समुचित विकास हो जाए तो यह पूर्वी चंपारण का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है।
संत सुरेश सिंह ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी है। उनका कहना है कि कई महीनों से कार्य चल रहा है, लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं दिख रही। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा गुणवत्तापूर्ण ढंग से निर्माण कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए ताकि लोगों का विश्वास कायम रह सके।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के दौरान प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की बात कही गई थी। इसके लिए शिविर भी लगाया गया और अधिकारियों ने जांच के बाद समस्या के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कई लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। इससे प्रभावित परिवारों में नाराजगी बढ़ रही है।
वहीं गांव के मुखिया प्रतिनिधि सरोज सिंह ने कहा कि घोड़दौर पोखरा उनके गांव की ऐतिहासिक धरोहर है। उन्होंने बताया कि गांव के लिए इससे बड़ा गौरव का विषय और कुछ नहीं हो सकता कि यहां एक सुंदर पर्यटन स्थल विकसित हो। उनका कहना है कि इस स्थल से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक एवं लोकश्रुतियां आज भी ग्रामीणों के बीच प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार नेपाल के राजा यहां आए थे और हनुमान मंदिर के समीप उपलब्ध जड़ी-बूटियों से उनकी बीमारी ठीक हुई थी। प्रसन्न होकर उन्होंने अपने घोड़े को दौड़ाया और जहां तक घोड़ा दौड़ा, उसी के आधार पर इस स्थान का नाम घोड़दौर पोखरा पड़ा।
सरोज सिंह ने कहा कि यदि निर्माण कार्य समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो जाए तो आने वाले समय में यहां देश-विदेश से पर्यटक पहुंच सकते हैं। इससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आज भी इस उम्मीद के साथ जी रहे हैं कि सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर को एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी पहल नहीं करता है तो इतनी बड़ी योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। लोगों ने सरकार एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए तथा मुआवजा सहित अन्य लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए।
अब देखना यह होगा कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी पर्यटन परियोजना को नई गति मिलती है या फिर ग्रामीणों की उम्मीदें यूं ही अधूरी रह जाती हैं।