कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सटे वन क्षेत्र में अवैध रॉक ब्लास्टिंग की एक गंभीर और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें चार तेंदुओं की मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ वन्यजीव संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अवैध गतिविधियों पर भी बड़ा आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि पत्थर खनन के लिए की गई अवैध ब्लास्टिंग के चलते यह हादसा हुआ, जिससे आसपास का पूरा जंगल क्षेत्र दहल उठा और वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना बेंगलुरु ग्रामीण जिले के एक जंगल से सटे इलाके में हुई, जहां लंबे समय से अवैध खनन और ब्लास्टिंग की शिकायतें मिल रही थीं। रविवार देर रात तेज धमाकों की आवाज़ सुनाई दी, जिसके बाद वन विभाग को सूचना मिली। जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो जंगल के भीतर चार तेंदुओं के शव मिले। माना जा रहा है कि ब्लास्टिंग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि तेंदुओं की मौके पर ही मौत हो गई।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मृत तेंदुओं में दो वयस्क और दो कम उम्र के तेंदुए शामिल हैं। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत के सटीक कारणों की पुष्टि की जा सके, हालांकि शुरुआती जांच में ब्लास्टिंग से लगी गंभीर आंतरिक चोटों को मौत का कारण माना जा रहा है। यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह इलाका तेंदुओं की आवाजाही के लिए जाना जाता है और इसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र माना जाता है।
इस मामले के सामने आने के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संगठनों में आक्रोश फैल गया है। संगठनों का कहना है कि प्रशासन को पहले से अवैध खनन की जानकारी थी, लेकिन समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि रियल एस्टेट और खनन माफिया के दबाव में जंगलों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसका खामियाजा निर्दोष वन्यजीवों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
वन विभाग और जिला प्रशासन ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस ने अवैध ब्लास्टिंग के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और खनन में इस्तेमाल किए गए विस्फोटक सामग्री के स्रोत की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बेंगलुरु और उसके आसपास तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और अवैध निर्माण गतिविधियों का नतीजा हैं। जंगलों के सिकुड़ने से तेंदुए और अन्य वन्यजीव इंसानी बस्तियों के करीब आ रहे हैं, जिससे उनका जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है। अवैध ब्लास्टिंग न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है।
फिलहाल, वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त गश्त बढ़ा दी है और अवैध खनन गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास और मुनाफे की दौड़ में क्या पर्यावरण और वन्यजीवों की कीमत यूं ही चुकाई जाती रहेगी, या अब इस पर सख्त और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।