नई दिल्ली: इंडियन प्राइवेट एकाउंटिंग फर्म (IPAC) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापों के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। फर्म ने कोर्ट से तत्काल कार्रवाई करते हुए रेड को रोकने की गुजारिश की है। IPAC का कहना है कि ED की टीम बिना उचित नोटिस और कानूनी प्रक्रिया का पालन किए उनके कार्यालयों और अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है, जिससे कारोबार और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

IPAC की याचिका में कहा गया है कि ED की कार्रवाई व्यवसायिक प्रतिष्ठा और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही है। फर्म ने कोर्ट से आग्रह किया कि छापेमारी को फिलहाल स्थगित किया जाए और सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड की वैधता की समीक्षा की जाए। कोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लिया और मामले की सुनवाई की अगली तारीख तय कर दी।

वहीं ED का कहना है कि छापेमारी कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और यह वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के हिस्से के रूप में जरूरी है। एजेंसी ने अदालत को बताया कि छापेमारी से संबंधित सभी दस्तावेज और जानकारी सुरक्षित हैं और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कोर्ट के समक्ष दो महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है: एक, एजेंसियों का अधिकार और दूसरी, नागरिक और व्यवसायिक संस्थानों के संवैधानिक अधिकार। हाईकोर्ट के फैसले का असर न सिर्फ IPAC पर बल्कि अन्य संस्थानों और वित्तीय मामलों में ED की कार्रवाई के तरीके पर भी पड़ सकता है।

अदालत ने फिलहाल सुनवाई के दौरान कहा कि सभी पक्षों की दलीलों को सुना जाएगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। IPAC की याचिका में तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया गया है, जिससे फर्म और उसके कर्मचारियों पर छापेमारी के कारण होने वाले नुकसान को रोका जा सके।