ईरान में बीते दो सप्ताह से चल रहे जनआंदोलन (Mass Movement) में मरने वालों की संख्या 60 के पार पहुँच गई है। शुरुआत आर्थिक समस्याओं (Economic Problems) और बढ़ती महंगाई (Inflation) के खिलाफ हुई थी, लेकिन अब यह आंदोलन (Movement) देश के कई शहरों में फैल गया है। नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (Iran Human Rights) के अनुसार, राष्ट्रीय मुद्रा (Currency) की गिरावट और बढ़ती कीमतों के विरोध में दर्जनों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।

तेहरान (Tehran) से शुरू हुए विरोध अब मशहद (Mashhad) सहित कई अन्य शहरों में फैल चुके हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स (Human Rights Activists) के अनुसार, देशव्यापी (Nationwide) विरोध में मरने वालों की संख्या 62 तक पहुँच गई है और कम से कम 2,300 लोग गिरफ्तार (Arrested) हुए हैं।

कड़ी पुलिस कार्रवाई (Police Action) के बावजूद नागरिक लगातार सड़कों (Streets) पर उतर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों (Protesters) पर आंसू गैस (Tear Gas) और पैलेट गन (Pellet Gun) का इस्तेमाल किया गया, लेकिन लोग फिर से इकट्ठा हो रहे हैं। एक प्रदर्शनकारी माजिद ने कहा कि वे अपने जीवन (Life) का खतरा जानते हुए भी बेहतर भविष्य (Better Future) के लिए विरोध कर रहे हैं।

देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) ने अमेरिका (USA) और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि उनके हाथ “ईरानियों (Iranians) के खून से रंगे हुए हैं।” वहीं, सरकारी मीडिया (State Media) ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार आतंकवादी (Terrorists) बताया।

यह विरोध दिसंबर के अंत में शुरू हुआ और तेहरान के अलावा अन्य प्रमुख शहरों में फैल गया। ईरान की मुद्रा डॉलर (Dollar) के मुकाबले 14 लाख तोमान (Toman) पार कर गई, जिससे व्यापारियों (Traders) ने बाजार (Market) बंद कर विरोध शुरू किया। अब जनता भी सड़कों पर उतर आई है और सरकार के खिलाफ नारे (Slogans) लगाने लगी है।

मौजूदा विरोध 2022-2023 के आंदोलन (Movement) की याद दिलाता है, जो महसा अमीनी (Mahsa Amini) की हिरासत में मौत के बाद भड़का था। उस समय की तरह सुरक्षा बल (Security Forces) ने घातक बल (Lethal Force) का इस्तेमाल किया था। वर्तमान हालात में भी वही दमनकारी (Repressive) रवैया दिख रहा है।