दिनेश कुमार पांडेय /रफ्तार ब्यूरो /बोकारो
मौसम की बेरुखी किसानों पर भारी पड़ रही है। झारखंड सूखाग्रस्त होने की ओर बढ़ रहा है। खेतों में बिचड़े तक तैयार नहीं हुए हैं और जो डाले गए थे वो भी सूख गए। अब किसान दूसरी बार बिचड़ा डालने को मजबूर हैं। ऐसे में खेती की लागत भी निकलना मुश्किल लग रहा है। राज्य में खेती का उपयुक्त समय 15 जुलाई तक ही माना जाता है। लेकिन अभी तक ज्यादातर खेतों में बिचड़े तैयार नहीं हैं। जो बिचड़े डाले भी गए थे, वो पानी के अभाव में सूख गए। कहीं-कहीं किसान अब दूसरी बार बिचड़ा डाल रहे हैं। अगर मानसून की बात करें तो झारखंड में मानसून का असर देखने को नहीं मिला है मानसून का बारिस बहुत कम देखी जा रही है इससे किसान को काफी परेशानी में देखा जा रहा है वहीं किसान बुद्धू मांझी ने कहा कि अभी तो स्थित यह है कि पानी नहीं होने के कारण बिचड़े भी अच्छा से नहीं बन पाया है और खेत का भी जुताई नहीं किया गया है किसानों को बारिश को बारिश नहीं होने के कारण बहुत दिक्कत का सामना करना पर रहा है, खेती करने में बहुत दिक्कत हो रहा है
वहीं किसान पंचानन कहते है कि बारिश की कमी के कारण दुबारा बीज डालना पड़ा क्योंकि पिछली बार बीज डाले थे उससे बिचड़े का ठीक ढंग से नहीं उगे जिस कारण दुबारा बिचड़े डालने पड़े दिक्कतें बहुत हो रही है। धान रोपनी अब शुरू हो जाना चाहिए था,अगर समय पर बारिश नहीं हुई तो हम लोगों को मजदूरी एक सहारा है पेट पालने के लिए। अगर समय पर खेती नहीं हुई तो किसान लागत भी नहीं निकाल पाएंगे। इन हालातों को देखते हुए राज्य में सूखे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब बात करते हैं बोकारो की। यहां के 90 प्रतिशत किसान बारिश पर ही निर्भर हैं। लेकिन इस बार अब तक राज्य में सिर्फ 125.6 एमएम बारिश हुई है। जबकि धान की खेती के लिए 750 से 1500 एमएम बारिश जरूरी होती है।
बोकारो में भी खेत प्यासे हैं और बिचड़े तैयार नहीं हैं। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जुलाई के तीसरे सप्ताह तक अच्छी बारिश नहीं हुई, तो झारखंड के कई जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जा सकते हैं। ऐसे में सरकार को अभी से वैकल्पिक व्यवस्था और किसानों के लिए राहत पैकेज पर काम करना होगा। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। उम्मीद सिर्फ बारिश की है।