सौरभ रॉय / रफ्तार मीडिया
रांची:खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में झारखंड की सत्तारूढ़ दल मुक्ति (झामुमो) अपने को समझा दिए बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। लोकसभा और राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद झामुमो ने इसे झारखंड के हितों और आदिवासी समाज के अधिकारों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। राज्य सरकार में मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी निर्णायक लड़ाई लड़ेगी और झारखंड में व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
अपने पूंजीपति दोस्तों को लाभ के लिए केंद्र सरकार है तत्पर-हफ़ीज़ुल हसन
वहीं, इस दौरान मंत्री हफीजुल हसन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि खनिज संशोधन विधेयक के माध्यम से केंद्र सरकार अपने पूंजीपति मित्रों के हित में ऐसा कानून लागू करने का प्रयास कर रही है, जिससे झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर सबसे पहला अधिकार राज्य की जनता का होना चाहिए।
20 अगस्त को केंद्रीय समिति की अहम बैठक
हफ़ीज़ुल हसन ने जानकारी देते हुए बताया कि विधेयक के विरोध और आगे की रणनीति तय करने के लिए 20 अगस्त को झामुमो केंद्रीय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। उन्होंने कहा कि बैठक में विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा के साथ साथ पार्टी के आंदोलन की रूपरेखा और आगामी कार्यक्रम तय किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए लंबे समय तक आंदोलन किया गया था, उसी तरह राज्य के हक और अधिकार के लिए भी व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
सीएम हेमंत सोरेन को झुकाने में नाकाम रही केंद्र सरकार- हफ़ीज़ुल हसन
हफीजुल हसन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजनीतिक रूप से दबाव में लाने और झुकाने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रही है। उन्होंने कहा कि जब इन प्रयासों में केंद्र सफल नहीं हुआ तो अब झारखंड के विकास और उसके संसाधनों से जुड़े मुद्दों के माध्यम से राज्य सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि केंद्र की मंशा झारखंड में विकास को रोकने की है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार को आशंका है कि यदि झारखंड में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़े और राज्य मजबूत हुआ तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झुकाना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि झामुमो इस प्रकार के किसी भी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है।
झारखंड से एक ढेला कोयला बाहर नहीं जाने देंगे- मंत्री
मंत्री हफीजुल हसन ने आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार विधेयक को वापस नहीं लेती है तो झामुमो आंदोलन को और व्यापक करेगा। उन्होंने कहा, झारखंड से एक भी ढेला कोयला बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से राज्य को पर्याप्त लाभ मिलना चाहिए। खनिज संपदा के दोहन से होने वाले आर्थिक लाभ में राज्य और यहां की जनता की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। झामुमो इस अधिकार के लिए सड़क से लेकर राजनीतिक स्तर तक संघर्ष करेगा।
दिशोम शिबू सोरेन के संघर्ष का किया उल्लेख
हफीजुल हसन ने झारखंड आंदोलन और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे संघर्ष और आंदोलन के बाद झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा कि आज दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्ष के कारण बने झारखंड राज्य का नेतृत्व उनके पुत्र हेमंत सोरेन कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि झामुमो की राजनीति हमेशा झारखंड के जल, जंगल और जमीन एवं यहां के आदिवासी और मूलवासी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष की रही है। पार्टी किसी भी ऐसे प्रावधान का विरोध करेगी, जिससे राज्य के संसाधनों पर झारखंड के अधिकार कमजोर होने की आशंका हो।
आंदोलन की रणनीति पर होगी चर्चा
आगामी 20 अगस्त की केंद्रीय समिति की बैठक को इसी क्रम में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय समिति के सदस्यों की मौजूदगी में विधेयक के खिलाफ आंदोलन को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है। पार्टी आंदोलन को किस स्तर तक ले जाएगी, इसके कार्यक्रम और स्वरूप पर भी बैठक में निर्णय लिया जा सकता है।हफीजुल हसन ने बताया कि झामुमो द्वारा विभिन्न जिला और प्रमंडल समिति की बैठक आयोजित कराई गई जिसके तहत भी आंदोलन को लेकर चर्चा हुई है।
बिल वापस नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मंत्री हफ़ीज़ुल ने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार विधेयक वापस नहीं लेती है तो झामुमो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी हर लोकतांत्रिक माध्यम का इस्तेमाल करेगी। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आर्थिक गतिविधियों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।