कासगंज। जनपद में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जिलाधिकारी (DM) प्रणय सिंह के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शहर में औचक छापेमारी की थी।
छापेमारी और सीलिंग की कार्रवाई
जांच टीम ने नियमों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 'श्री सिद्धि विनायक', 'विनायक' और 'सिद्धि विनायक' अस्पतालों को सील कर दिया था। इसके अलावा 'कौशल अल्ट्रासाउंड सेंटर' को भी बंद करवा दिया गया था।
जांच में मिलीं गंभीर खामियां
डॉक्टरों की अनुपस्थिति: निरीक्षण के दौरान किसी भी अस्पताल में पंजीकृत (रजिस्टर्ड) डॉक्टर या अधिकृत मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं पाया गया।
टेक्नीशियन के भरोसे जांच: अल्ट्रासाउंड सेंटर पर किसी योग्य डॉक्टर के बजाय अनाधिकृत टेक्नीशियन द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था।
री-ओपनिंग पर बवाल
कार्रवाई के महज 4 दिनों (96 घंटे) के भीतर ही इन सील किए गए अस्पतालों के ताले दोबारा खुल गए और काम शुरू हो गया। इतने कम समय में संचालन शुरू होने से स्थानीय स्तर पर आक्रोश है। नागरिक और विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि बिना योग्य डॉक्टरों की मौजूदगी जैसी गंभीर खामियों को महज 96 घंटों में कानूनी रूप से कैसे दूर कर लिया गया?
अधिकारियों की चुप्पी से गहराया संदेह
हॉस्पिटलों के इतनी जल्दी दोबारा खुलने पर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी साध रखी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे विभागीय निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी अजय कुमार से बात हुई तो उन्होंने बताया हम कि इन हॉस्पिटल अस्पताल वालों पर हम जल्द ही सील कर कानूनी कार्रवाई करेंगे